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ईरान के राष्ट्रपति ने BRICS सम्मेलन में अमेरिका और इजराइल पर कड़ा हमला किया

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने BRICS सम्मेलन में अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ये देश ईरान की सैन्य ताकत का सामना करने के बजाय आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। पेजेश्कियान ने अमेरिका के परमाणु कार्यक्रम पर आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हैं। उन्होंने बातचीत के लिए तत्परता जताई, लेकिन अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की संभावना को खारिज किया।
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ईरान के राष्ट्रपति का कड़ा बयान


भारत में BRICS सम्मेलन के दूसरे दिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ये देश ईरान की सैन्य ताकत का सामना करने के बजाय आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं।


सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, पेजेश्कियान ने यह सवाल उठाया कि यदि अमेरिका खुद को एक शक्तिशाली योद्धा मानता है, तो उसे ईरान की सेना का सामना करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक वस्तुओं जैसे पानी, भोजन, दवाइयों और रोजगार के साधनों को प्रभावित किया जा रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के दबाव से उनका देश झुकने वाला नहीं है।


परमाणु हथियारों के आरोपों का खंडन

पेजेश्कियान ने अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि तेहरान की परमाणु गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार चल रही हैं और ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी होती रही है।


उनका कहना था कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास ईरान के परमाणु हथियार बनाने के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें उन्हें पेश करना चाहिए। उन्होंने इन आरोपों को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश बताया।


परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए तत्पर

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने अमेरिका के साथ तत्काल सीधी बातचीत की संभावना से इनकार किया। पेजेश्कियान ने इसके पीछे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को कारण बताया।


उन्होंने 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे हालात में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधे संवाद करना बहुत कठिन है।


पेजेश्कियान ने यह भी कहा कि पहले दोनों देशों के बीच एक समझौता और मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) हुआ था, लेकिन अमेरिका ने बाद में इससे मुंह मोड़ लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और सैन्य हमले बंद किए जाएं।


ईरान की नीतियों पर अमेरिका और इजराइल का आरोप

पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल पर यह आरोप भी लगाया कि वे ईरान की इजराइल विरोधी नीतियों और फिलिस्तीन के समर्थन को उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार बना रहे हैं।