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ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का सीमित प्रतिनिधिमंडल

भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में एक सीमित प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। यह कदम ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने के लिए है, जबकि अमेरिका और इजराइल को नाराज करने से बचने का प्रयास भी है। जानें इस निर्णय के पीछे की रणनीति और भारत की विदेश नीति के संकेत।
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भारत का प्रतिनिधिमंडल


ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की 2024 में हुई दुर्घटना में मौत के बाद, भारत ने उनके अंतिम संस्कार में तत्कालीन उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भेजा था। अब, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत एक छोटा प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है। खामेनेई का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कई दिनों तक चलेगा। उनकी मृत्यु अमेरिका और इजराइल के हमले के कारण हुई थी। भारत सरकार ने इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को भेजने का निर्णय लिया है।


सरकार का यह कदम ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने के लिए है, लेकिन अमेरिका और इजराइल को नाराज करने से भी बचना चाहती है। यदि भारत की ओर से कोई उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाता, तो यह एक अलग संदेश देता। ध्यान देने योग्य है कि भारत ने खामेनेई की हत्या की आलोचना नहीं की। विदेश सचिव ने कई दिनों बाद ईरानी दूतावास जाकर श्रद्धांजलि दी। इसी तरह, भारत ने अमेरिकी हमले में मारे गए ईरानी नौसैनिकों की निंदा भी नहीं की। भारत ने युद्ध से दूरी बनाए रखी है, लेकिन उसका झुकाव इजराइल और अमेरिका की ओर स्पष्ट है।