ईरानी कोबरा के डसने से हिमाचल में दो लोगों की मौत, एंटी स्नेक वेनम बेअसर
हिमाचल प्रदेश में ईरानी कोबरा का हमला
चंबा जिले में ईरानी कोबरा के डसने से दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है। यह भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से होने वाली पहली मौत है। एक व्यक्ति की मौत सांप के डसने के आधे घंटे के भीतर हुई, जबकि दूसरे ने तीन दिन बाद दम तोड़ दिया।
सांप का हमला सुबह के समय
दोनों व्यक्तियों पर सुबह के समय सांप ने हमला किया। ठंडे और ऊंचे क्षेत्रों में सांप धूप सेंकने के लिए बाहर निकले थे, और इसी दौरान दोनों लोग उनके संपर्क में आए। ईरानी कोबरा आमतौर पर मानव बस्तियों से दूर रहता है और सामान्य परिस्थितियों में हमला नहीं करता, लेकिन खतरा महसूस होने पर काट सकता है।
पहली घटना का विवरण
पहली घटना उल्लांसा गांव में हुई, जहां 40 वर्षीय व्यक्ति सुबह लगभग 9:30 बजे सेब के बगीचे में कीटनाशक का छिड़काव कर रहा था। इस दौरान उसका पैर सांप पर पड़ गया, जिससे सांप ने उसे दो बार डस लिया। कुछ समय बाद उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगी। परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पहले स्थानीय झाड़-फूंक करने वाले के पास ले गए। उसकी हालत बिगड़ने पर तीसरे दिन उसे सिविल अस्पताल भरमौर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दूसरी घटना का विवरण
दूसरी घटना में 62 वर्षीय व्यक्ति सुबह लगभग 9 बजे काम पर जा रहा था। उसने अनजाने में ईरानी कोबरा पर पैर रखा, जिससे सांप ने उसके बाएं पैर पर डस लिया। अस्पताल ले जाते समय वह रास्ते में गिर पड़ा। उसे सिविल अस्पताल तीसा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके पैर पर सांप के डसने के निशान पाए गए।
एंटी स्नेक वेनम की प्रभावशीलता
शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम मुख्य रूप से चार प्रमुख प्रजातियों के जहर के खिलाफ तैयार किया जाता है, जिनमें चश्माधारी कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन करैत और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। कैस्पियन कोबरा का जहर इन प्रजातियों से भिन्न है। अध्ययन के अनुसार, उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम इस जहर को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय नहीं कर पाता। ईरानी कोबरा का जहर हृदय पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, जिससे रक्तचाप में गिरावट और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, मौत के मामलों में जहर के प्रभाव की भूमिका को लेकर और अध्ययन की आवश्यकता है।
