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ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला किया। उन्होंने ईरान के नागरिकों पर हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका देश आतंकवाद का केंद्र नहीं है। पेजेश्कियान ने ईरान के परमाणु अधिकारों की रक्षा की और फिलिस्तीन के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जानें उनके भाषण की प्रमुख बातें और ईरान की स्थिति पर उनके विचार।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान का बयान

न्यूयॉर्क: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और इजरायल पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान आतंकवाद का केंद्र नहीं है, बल्कि इसके लोग खुद हमलों का शिकार हुए हैं। पेजेश्कियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा।


ईरान का बचाव

‘हमने आतंक नहीं फैलाया, अपना बचाव किया’


अपने भाषण में, पेजेश्कियान ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और मीनाब के एक स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें प्रदर्शित की। उन्होंने कहा कि ईरान ने केवल अपनी रक्षा की है और उसके नागरिकों को हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आरोप लगाया।


स्कूल हमले का जिक्र

पेजेश्कियान ने मीनाब के शाजरेह तैय्यबेह स्कूल पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें बड़ी संख्या में बच्चे मारे गए। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया जांच के अनुसार, 28 फरवरी को हुए इस हमले में 156 लोग मारे गए थे, जिनमें 120 बच्चे और 26 शिक्षक शामिल थे। अमेरिका ने जानबूझकर स्कूल को निशाना बनाने से इनकार किया है।


परमाणु अधिकार पर जोर

परमाणु अधिकार पर भी दिया जोर


ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि जब इजरायल के परमाणु हथियारों पर सवाल नहीं उठाए जाते, तब ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निरंतर जांच की जाती है। उनका कहना था कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग का अधिकार है और दबाव या प्रतिबंधों के माध्यम से उसके अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।


फिलिस्तीन का मुद्दा

फिलिस्तीन का मुद्दा भी उठाया


पेजेश्कियान ने अपने संबोधन में गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन को नजरअंदाज करके मध्य पूर्व में स्थायी शांति की बात नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, दशकों से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के बावजूद फिलिस्तीनी क्षेत्रों में हिंसा और कब्जे का मुद्दा बना हुआ है।


दबाव के आगे नहीं झुकेंगे

‘दबाव के आगे नहीं झुकेंगे’


पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन वह दबाव, धमकी और सैन्य ताकत की भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव से ईरानी लोगों का रुख नहीं बदलेगा और ईरान अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।


एक अहम तथ्य

एक अहम तथ्य: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पेजेश्कियान के भाषण की शुरुआत में हॉल से नहीं निकला था। इसके बजाय, 22 सितंबर को ट्रंप के UNGA भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हॉल से बाहर चले गए थे। पेजेश्कियान और ईरानी विदेश मंत्री उस समय हॉल में मौजूद नहीं थे।