उज्ज्वला योजना में LPG सिलेंडरों की संख्या में कमी: जानें कारण और प्रभाव
उज्ज्वला योजना के तहत LPG सिलेंडरों की संख्या में कमी
हाल ही में उज्ज्वला योजना के अंतर्गत मिलने वाले सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या में कटौती की गई है। 2016 में सालाना 12 सिलेंडर देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब यह संख्या घटकर 4 रह गई है। इस योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को हर साल हजारों करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ता है। कनेक्शन वितरण, सिलेंडर पर सब्सिडी और अन्य खर्चों को मिलाकर सरकार को हर साल एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडरों की संख्या में कमी आई है।
वर्तमान में, जब उज्ज्वला योजना के लाभार्थी गैस सिलेंडर भरवाते हैं, तो कुछ दिनों में उनके बैंक खाते में 300 रुपये की सब्सिडी आ जाती है। मई 2022 में सब्सिडी की शुरुआत 200 रुपये प्रति सिलेंडर से हुई थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। हालांकि, पहले 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी दी जा रही थी, जिसे अब घटाकर 4 कर दिया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की वार्षिक औसत खपत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि एक सिलेंडर की लागत लगभग 1600 रुपये है, लेकिन सब्सिडी के माध्यम से इसे सस्ता उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगभग 1000 रुपये प्रति सिलेंडर खर्च कर रही है।
योजना के लाभ
सरकार का दावा है कि इस योजना के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है और चूल्हे के धुएं से राहत मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में LPG की खपत 17696 हजार मीट्रिक टन थी, जो 2024-25 में बढ़कर 31986 मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जो कि 81 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। घरेलू ग्राहकों की संख्या भी 1 अप्रैल 2014 को 14.52 करोड़ से बढ़कर 1 अप्रैल 2025 तक 32.94 करोड़ हो गई।
लाभार्थियों की संख्या
मार्च 2026 में लोकसभा में सांसदों ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या के बारे में सवाल पूछा था। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि 1 मार्च 2026 तक कुल 10.56 करोड़ कनेक्शन बांटे जा चुके थे। इनमें से 2.95 करोड़ कनेक्शन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लाभार्थियों को दिए गए थे।
कनेक्शन वितरण की प्रक्रिया
इस योजना के तहत कनेक्शन वितरण की प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं। सरकार ने 8 करोड़ गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य सितंबर 2019 में पूरा किया। इसके बाद उज्ज्वला 2.0 लॉन्च की गई, जिसके तहत 1 करोड़ अतिरिक्त परिवारों को कनेक्शन दिए गए।
सरकार का खर्च
सरकार ने पिछले पांच वर्षों में योजना के लाभार्थियों को सीधी सब्सिडी देने पर कुल 45432.24 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा, 2022-23 में तेल कंपनियों को 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। 2025-26 के लिए भी 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी गई है।
क्या सरकार पैसे बचाएगी?
2024-25 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने कुल 46.22 करोड़ सिलेंडर भरवाए। एक सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जिससे सब्सिडी पर सालाना 10866 करोड़ रुपये खर्च हुए। अब, सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 4 करने से सरकार को कुछ पैसे बचाने की उम्मीद है।
खर्च का विश्लेषण
सरकार ने अब तक इस योजना पर कम से कम 1,14,954 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हर साल लगभग 10 से 30 हजार करोड़ रुपये इस योजना पर खर्च हो रहे हैं। ऐसे में सरकार धीरे-धीरे इस योजना को सीमित करने की दिशा में बढ़ रही है।
