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उत्तर प्रदेश: इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर में अग्रणी बनने की दिशा में

उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि राज्य का लक्ष्य टेक्नोलॉजी और नवाचार में अग्रणी बनना है। उन्होंने निवेश के अवसरों और उद्योगों की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। जानें कैसे उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में एक प्रमुख टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।
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उत्तर प्रदेश का नया तकनीकी युग


ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में देश का प्रमुख राज्य बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का अगला विकास इंजन बनने की दिशा में अग्रसर है।


उन्होंने यह भी कहा कि वह दिन दूर नहीं जब निवेश के संदर्भ में उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राज्य को टेक्नोलॉजी, नवाचार, अनुसंधान और निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है, और इसके लिए आवश्यक इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।


जितिन प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय दृष्टिकोण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हो रहे परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से देखा। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय वाली डबल इंजन सरकार इस बदलाव को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और व्यापार देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं, और उत्तर प्रदेश इन माध्यमों से नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।


टेक्नोलॉजी का विस्तार पूरे राज्य में

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब निवेश केवल नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी के अवसरों का निर्माण किया जाएगा। इसका सीधा लाभ राज्य के युवाओं को होगा। उन्होंने कहा कि सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डेटा सेंटर्स, एआई लैब्स और अन्य तकनीकी बुनियादी ढांचे उत्तर प्रदेश में बन रहे नए इकोसिस्टम की तस्वीर पेश करते हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो।


भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में वृद्धि

जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहलों के माध्यम से देश कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब इसी ताकत के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण और उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना इस विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


उद्योगों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह

केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी विकास को गति देने का माध्यम हैं, लेकिन उद्योगों की दीर्घकालिक सफलता उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगी। सरकार भूमि, नीतियां, मंजूरियां और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उद्योगों को अंततः प्रतिस्पर्धात्मक और आत्मनिर्भर बनना होगा।


एआई का उपयोग और एमएसएमई की उत्पादकता

जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई का उपयोग केवल तकनीक अपनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्पादकता, दक्षता और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एआई के माध्यम से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम करता है या उत्पादकता बढ़ाता है, तो यही तकनीक का वास्तविक लाभ होगा।


जीसीसी का विस्तार

नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी बढ़ेगा जीसीसी का विस्तार: आलोक कुमार

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नोएडा में पहले से जीसीसी मौजूद हैं, जबकि कुछ जीसीसी ने लखनऊ में भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई जीसीसी नीति और आईटी नीति के जरिए अब नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में भी अधिक जीसीसी आकर्षित करने का लक्ष्य है।