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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027: सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की खींचतान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ गई है। इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। मसूद का कहना है कि सीटों का बंटवारा जल्द होना चाहिए, जबकि इकरा ने अखिलेश यादव की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। दोनों दलों के बीच यह विवाद केवल सीट शेयरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके राजनीतिक आधार और नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी है। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की कहानी।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: आगामी विधानसभा चुनावों की तिथियों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाएँ हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं। यह राजनीतिक मतभेद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख मुस्लिम नेताओं के बीच स्पष्ट हो रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद इकरा हसन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बयानबाजी बढ़ गई है।


इमरान मसूद का दबाव

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में सपा के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यदि गठबंधन होना है, तो सीटों का बंटवारा जल्द तय किया जाना चाहिए, ताकि दोनों दल अपनी चुनावी रणनीति को तैयार कर सकें। 18 सितंबर को दिए बयान में मसूद ने कहा कि सीट शेयरिंग में देरी से नुकसान हो रहा है और कांग्रेस अपनी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे गठबंधन हो या न हो, कांग्रेस चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।


इकरा हसन का जवाब

इमरान मसूद के बयानों के बाद, कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए अखिलेश यादव की भूमिका महत्वपूर्ण है। इकरा ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है, तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह बयान कांग्रेस नेताओं के लिए सीधा जवाब माना जा रहा है।


इमरान मसूद और इकरा हसन का महत्व

इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण मुस्लिम चेहरे हैं। मसूद कांग्रेस के सांसद हैं, जबकि इकरा हसन सपा के सांसद हैं। उनके बीच की सार्वजनिक बयानबाजी केवल व्यक्तिगत राजनीतिक बहस नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि दोनों दल अपने-अपने संगठनात्मक आधार और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर सीटों पर दावा करना चाहते हैं।


गठबंधन की चुनौतियाँ

गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों पार्टियाँ 2027 के चुनाव में साथ आने की बात तो कर रही हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन को देखते हुए उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि उनका ध्यान जीत के फॉर्मूले पर है, न कि केवल सीटों की संख्या पर।


कांग्रेस नेता का विवाद में कूदना

इकरा हसन के बयान के बाद, कांग्रेस नेता सैयद असीम वकार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के कारण ही इकरा लोकसभा पहुंची हैं। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। यह स्पष्ट है कि विवाद अब केवल सीट शेयरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों दल अपने राजनीतिक आधार और नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी दावे कर रहे हैं।


पश्चिमी यूपी में खींचतान

सपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद का एक उदाहरण अगस्त में सहारनपुर की DISHA बैठक के दौरान भी देखने को मिला था। बैठक में सपा विधायक और कांग्रेस सांसद के बीच तीखी बहस हुई थी। हालांकि, दोनों नेताओं ने बाद में इसे बैठक की प्रक्रिया से जुड़ी चर्चा बताया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि दोनों दलों के बीच स्थानीय स्तर पर कड़ा प्रतिस्पर्धा है।