उत्तर प्रदेश में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, राहत कार्य जारी
बाढ़ की स्थिति और प्रशासनिक उपाय
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य के 13 जिलों में 173 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिससे 84,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। गंगा, यमुना, सरयू, घाघरा और मंदाकिनी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।
वाराणसी में गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल जलमग्न हो गए हैं, जिसके कारण अंतिम संस्कार छतों पर किए जा रहे हैं। दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का आयोजन भी गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर किया जा रहा है।
प्रयागराज में, लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में 3 फीट तक पानी भर गया है। लगभग 6,000 मकान जलमग्न हैं और 7,000 से अधिक परिवार छतों पर रहने को मजबूर हैं। छात्रों के हॉस्टलों में पानी घुसने से 2,000 से अधिक विद्यार्थी सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जल निकासी के लिए 24 से 48 घंटे का सख्त आदेश दिया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान से बाढ़ का पानी सड़कों तक पहुंच गया है, जिससे लोग नावों का उपयोग कर रहे हैं। सोनभद्र में जलस्तर बढ़ने के कारण कनहर बांध के सभी 14 फाटकों को खोलना पड़ा। लखीमपुर खीरी में एक प्राथमिक विद्यालय में जलभराव के दौरान 5 फीट लंबा कोबरा सांप घुस आया, जिससे हड़कंप मच गया।
राज्य सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेशभर में 1,589 बाढ़ चौकियां और 1,263 शेल्टर कैंप स्थापित किए गए हैं। राहत कार्यों के लिए 400 से अधिक नावें और 1,100 से ज्यादा गोताखोर तैनात किए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दी है और लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी है।
