उत्तर प्रदेश में मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार के लिए सख्त कदम
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में सुधार के लिए नई पहल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की शुद्धता और पौष्टिकता की नियमित प्रयोगशाला जांच कराई जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश के सभी विकासखंडों के सरकारी स्कूलों से अचानक भोजन के नमूने लिए जाएंगे। यह कठोर कदम हाल ही में विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों और वायरल वीडियो के बाद उठाया गया है, जिसमें भोजन की खराब गुणवत्ता और स्वच्छता की कमी का उल्लेख किया गया था।
हर विकासखंड से 10 नमूने लिए जाएंगे
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीमें हर महीने प्रत्येक विकासखंड से कम से कम 10 परिषदीय स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगी। इस दौरान रसोई में बने भोजन के नमूने सील कर जांच के लिए अधिकृत प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे।
बैक्टीरिया और मिलावट की जांच की जाएगी
लैब में भोजन के नमूनों की गहन जांच की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से हानिकारक बैक्टीरिया जैसे ई-कोलाई और अन्य संक्रमणों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही, भोजन में उपयोग किए जाने वाले तेल, मसालों और अनाज में मिलावट की भी जांच की जाएगी।
दूध और फलों के वितरण पर कड़ी निगरानी
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने बच्चों को दिए जाने वाले दूध और फलों की निगरानी को भी सख्त कर दिया है। कई स्कूलों में निरीक्षण के दौरान यह पाया गया था कि बच्चों को निर्धारित मात्रा में दूध नहीं मिल रहा था या फल वितरित नहीं किए जा रहे थे। अब इस लापरवाही को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यदि किसी स्कूल का भोजन लैब टेस्ट में असुरक्षित पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें संबंधित सप्लायर, रसोइयों और लापरवाह स्कूल प्रशासन के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई शामिल होगी।
शिक्षकों और समुदाय को दी गई जिम्मेदारी
खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के हाइजीन प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, बच्चों को भोजन परोसने से कम से कम आधे घंटे पहले स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों या शिक्षकों द्वारा भोजन का परीक्षण करना और उसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
