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उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण: एक नई तकनीकी क्रांति

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रवि टाम्टा ने 13 साल की मेहनत के बाद अपना इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल 'हपिडा स्काइनैक्स' का सफल परीक्षण किया। इस एकल-सीट प्रोटोटाइप ने लगभग एक मिनट तक उड़ान भरी, जिससे स्थानीय अधिकारी और दर्शक अचंभित रह गए। यह परीक्षण भारत में पर्सनल एयर-मोबिलिटी तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, भारत में एयर टैक्सी योजना अभी भी प्रारंभिक परीक्षण चरण में है, और कई चुनौतियाँ सामने हैं।
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इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में, रवि टाम्टा ने 13 वर्षों की मेहनत और अनुसंधान के बाद अपना इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल उड़ाया। इस 'एयर कार' ने हेलीकॉप्टर की तरह उड़ान भरकर देशभर में चर्चा का विषय बना दिया। बीते शुक्रवार को, 'हपिडा स्काइनैक्स' नामक इस एकल-सीट प्रोटोटाइप ने आर्मी हेलिपैड से उड़ान भरी, जिससे स्थानीय लोग और जिला अधिकारी अचंभित रह गए।


उड़ान का अनुभव

रवि टाम्टा लगभग एक मिनट तक हवा में रहे, जबकि जिला मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर घोड़के सहित अन्य स्थानीय लोग इस परीक्षण को देख रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए थे।


भारत में पर्सनल एयर-मोबिलिटी का महत्व

हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक रवि टाम्टा ने बताया कि उनका उद्देश्य भारत को पर्सनल एयर-मोबिलिटी तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रोटोटाइप के और परीक्षण किए जाएंगे, जिससे इसकी सुरक्षा, क्षमता और प्रदर्शन में सुधार होगा।


पर्सनल एयर-मोबिलिटी का वैश्विक परिदृश्य

अविएशन इंजीनियर अभिषेक राय के अनुसार, पर्सनल एयर-मोबिलिटी तकनीक मुख्य रूप से विकसित देशों और बड़ी कंपनियों तक सीमित रही है। अल्मोड़ा जैसे छोटे शहर से एक स्वदेशी इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


भारत में एयर टैक्सी योजना की स्थिति

हालांकि, भारत में एयर टैक्सी योजना अभी भी परीक्षण के प्रारंभिक चरण में है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक एयर टैक्सी की ट्रायल सेवाएं शुरू करना है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा है कि अगले साल पूरी तरह से परीक्षण चरण में जाने की उम्मीद है।


चुनौतियाँ और संभावनाएँ

अभिषेक राय ने बताया कि भारत में बैटरी निर्माण, पर्यावरणीय मुद्दों और सुरक्षा प्रमाणन की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ हैं। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने में समय लगता है।