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उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया है, जो कुछ शिक्षण संस्थानों से जुड़ी हैं। जांच में यह सामने आया है कि कई छात्रवृत्तियां उन छात्रों के नाम पर ली गईं, जो वास्तव में पढ़ाई नहीं कर रहे थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और ईडी की कार्रवाई के पीछे की कहानी।
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उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

ईडी की जांच और संपत्तियों की कुर्की


देहरादून। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तराखंड में कमजोर वर्ग के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत, ईडी ने तीन शैक्षणिक संस्थानों से 13.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। ये संस्थान मेरठ के एक भाजपा नेता से जुड़े हुए हैं।


महावीर यूनिवर्सिटी, मदरहुड यूनिवर्सिटी और अन्य शिक्षण संस्थान, जो रुड़की और हरिद्वार में स्थित हैं, इस जांच के दायरे में आए हैं। ईडी ने इन संस्थानों से संबंधित 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है। देहरादून स्थित ईडी के सब-जोनल कार्यालय की जांच में यह पता चला कि 2011-12 से 2016-17 के बीच, उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा दी गई छात्रवृत्ति राशि का दुरुपयोग किया गया था।


जिन संस्थानों की जांच की जा रही है, उनमें मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज/मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) और महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इन संस्थानों और उनसे जुड़े ट्रस्टों पर छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।


जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह पता चला है कि छात्रवृत्ति उन छात्रों के नाम पर ली गई, जो वास्तव में इन संस्थानों में पढ़ाई नहीं कर रहे थे। इसके अलावा, कई छात्र कक्षाओं में उपस्थित नहीं थे, परीक्षा में फेल हो चुके थे, या फिर विश्वविद्यालय में पंजीकृत नहीं थे।