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एफसीआरए बिल पर विपक्ष का विरोध, सरकार ने भेजा जेपीसी को

सरकार ने एफसीआरए बिल को विवाद के बीच संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का निर्णय लिया है। विपक्ष ने इस कदम का विरोध किया है, जिसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता शामिल हैं। जानें इस मुद्दे पर क्या कहा गया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं क्या हैं।
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एफसीआरए बिल का विवाद


नई दिल्ली। सरकार ने एफसीआरए बिल को लेकर चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का निर्णय लिया है। बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच, सरकार ने इस बिल को जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे अंततः स्वीकार कर लिया गया। जेपीसी में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा के सदस्य शामिल होंगे।


कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस बिल को जेपीसी में भेजने का विरोध किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कुछ बिलों को जेपीसी के पास भेजा जाता है, और सरकार इसी प्रक्रिया का पालन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष को इस बिल में कोई आपत्ति है, तो वे जेपीसी के सामने अपनी बात रख सकते हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एफसीआरए बिल का विरोध करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। रिजिजू ने यह दावा किया कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, जिस पर अखिलेश ने तंज करते हुए पूछा, 'आप बताइए कि कौन सा बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है?'