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एयर इंडिया की उड़ान में तकनीकी खराबी से यात्रियों को हुआ नुकसान

4 अगस्त को एयर इंडिया की एक उड़ान में तकनीकी खराबी के कारण 24 यात्री घायल हो गए। विमान की हाइड्रोलिक प्रणाली में एक साथ खराबी आई, जिससे उड़ान के दौरान गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं, जिसमें पायलटों की मन:प्रभावी पदार्थों की जांच भी शामिल है। जानें इस घटना के बारे में विस्तार से और क्या कदम उठाए गए हैं।
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फुकेत से दिल्ली की उड़ान में आई तकनीकी समस्या

4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट अचानक 36,000 फीट की ऊंचाई से 300 फीट नीचे चली गई। इस टर्बुलेंस के कारण 24 यात्री घायल हुए। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की 10 पन्नों की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम के तीनों रंगों—ग्रीन, ब्लू और येलो—में एक साथ खराबी आई थी। हालांकि, थोड़ी देर बाद ये सिस्टम फिर से काम करने लगे, जिसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा गया। एएआईबी इस घटना की तकनीकी और अन्य पहलुओं से जांच कर रही है।


विमान के अंदर हुए नुकसान का विवरण

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि हवा में हुई उथल-पुथल के कारण विमान के अंदर काफी नुकसान हुआ। छत के कई पैनल में दरारें आईं, सामान रखने के लिए बनाए गए खानों के कुछ हिस्से अपनी जगह से हट गए, और रेलिंग टूट गई। इसके अलावा, चालक दल की एक सीट और आपातकालीन निकास के हैंडल को भी नुकसान पहुंचा।


मुख्य पायलट की रिपोर्ट पर कार्रवाई की सिफारिश

एएआईबी ने मन:प्रभावी पदार्थों की जांच में मुख्य पायलट की रिपोर्ट 'निगेटिव नहीं' आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। जबकि को-पायलट की रिपोर्ट 'निगेटिव' आई है, जिसका मतलब है कि उसने कोई मन:प्रभावी पदार्थ का सेवन नहीं किया था। एएआईबी ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है।


उड़ान के दौरान क्या हुआ?

4 अगस्त को सुबह 7:11 बजे फुकेत अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट में तीन शिशुओं समेत 137 यात्री, दो पायलट और छह चालक दल के सदस्य सवार थे। 9:10 बजे विमान कोलकाता के उड़ान क्षेत्र में पहुंचा, जहां एटीसी ने इसे 34,000 से 36,000 फीट की ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया।


रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 9:32:43 पर विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा। इसी समय ग्रीन हाइड्रोलिक प्रणाली में प्रेशर खत्म होने की सूचना मिली। चार सेकंड बाद, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक में भी प्रेशर खत्म होने का संकेत मिला।


इसके तुरंत बाद ऑटोपायलट बंद हो गया। तीन सेकंड बाद विमान के 'स्टॉल' होने की चेतावनी मिली। उस समय को-पायलट विमान उड़ा रहा था, जिसने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। इसके बाद मुख्य पायलट ने नियंत्रण अपने हाथ में लिया। इस दौरान विमान ने निर्धारित ऊंचाई से पहले लगभग 372 फीट ऊपर जाने के बाद 292 फीट नीचे आ गया।


कुछ ही समय में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फिर से काम करने लगे। घटना के समय सीट बेल्ट बांधने का संकेत बंद था, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं। पायलटों ने नजदीकी एयरपोर्ट पर उतरने के बजाय दिल्ली तक उड़ान जारी रखी। अंततः 11 बजे विमान ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की।