एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ, कांग्रेस ने उठाए सवाल
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। इस पद के लिए 5585 आवेदनों में से चयन प्रक्रिया के बाद उनका नाम बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में घोषित किया गया। उनकी नियुक्ति के बाद उन्हें देशभर से बधाइयाँ मिल रही हैं, और उनके चार दशकों के सैन्य सेवा, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किए गए कार्यों की चर्चा हो रही है।
कांग्रेस नेता का बयान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई छिपा हुआ सच नहीं है, जिसके कारण उन्हें सीईओ बनाया गया। अल्वी ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए, रिटायर्ड एयर चीफ की नियुक्ति पर संदेह व्यक्त किया।
राशिद अल्वी की चिंताएँ
राशिद अल्वी ने कहा, 'भाजपा की मौजूदा सरकार सुप्रीम कोर्ट के जजों को राज्यपाल और राज्यसभा का सदस्य बना रही है, जिससे लोगों में संदेह पैदा होता है। अब रिटायर्ड एयर चीफ को राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बना दिया गया है, इससे उनका क्या संबंध है?'
नियुक्ति पर उठे सवाल
उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई सच छिपा नहीं है, जिसके चलते जितेंद्र मिश्रा को सीईओ बनाया गया। अल्वी ने यह भी कहा कि भाजपा की नीतियाँ देश को नुकसान पहुँचा सकती हैं। उन्होंने राम मंदिर के चंदा चोरी मामले पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि अभी तक डकैती करने वालों का पता नहीं चल पाया है।
जितेंद्र मिश्रा की पृष्ठभूमि
अब जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ बन गए हैं। यह नियुक्ति चंदा चोरी विवाद के बाद की गई है। इससे पहले, उन्होंने भारतीय वायुसेना में महत्वपूर्ण सेवाएँ दी हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड के प्रमुख रहे हैं। अब उनकी जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट की देखरेख करना है।
