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एलयूसीसी पोंजी स्कीम में प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, ₹30 करोड़ की संपत्तियां जब्त

प्रवर्तन निदेशालय ने ₹10,000 करोड़ के एलयूसीसी पोंजी स्कीम घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने आरोपियों की ₹30 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की हैं, जिसमें नकद, आभूषण और महंगी कारें शामिल हैं। इस मामले में समीर अग्रवाल फरार हैं, जबकि एक सहयोगी को गिरफ्तार किया गया है। जानें इस घोटाले की पूरी कहानी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
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प्रवर्तन निदेशालय की जांच में तेजी

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹10,000 करोड़ के बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) पोंजी स्कीम घोटाले की जांच को तेज कर दिया है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत, इस केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोपियों की ₹30 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को फ्रीज और जब्त किया है। यह कार्रवाई सागा ग्रुप (SAGA Group) के प्रमोटर समीर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के मुंबई और भोपाल में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी के बाद की गई है।


छापेमारी में मिली संपत्तियों का विवरण

ईडी की तलाशी के दौरान बेहिसाब संपत्तियों और दस्तावेजों की बरामदगी हुई है। विभिन्न बैंकों में जमा राशि, लिस्टेड शेयर, म्यूचुअल फंड और LIC पॉलिसियों सहित कुल ₹30 करोड़ से अधिक की वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, आरोपियों के ठिकानों से ₹1.53 करोड़ की भारतीय नकदी और लगभग ₹35 लाख की विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई है। इस छापेमारी में ₹5.25 करोड़ से अधिक मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण, कीमती रत्न और सोने के बिस्किट भी शामिल हैं। एजेंसी ने आरोपियों के पास से 9 महंगी लग्जरी कारों को भी अपने कब्जे में लिया है।


एलयूसीसी घोटाले का परिचय

जानकारी के अनुसार, यह मामला 'लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी' और सागा ग्रुप द्वारा संचालित एक कथित पोंजी (Chit fund) स्कीम से संबंधित है। आरोप है कि 2009 से इस समूह ने देशभर के निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर असाधारण रिटर्न का लालच दिया। जांच में पता चला है कि बिना किसी वैध व्यावसायिक गतिविधियों के लगभग 30.51 लाख निवेशकों से ₹10,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई और बाद में इसे हड़प लिया गया। इस धन को विभिन्न शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से डायवर्ट किया गया था।


जांच की वर्तमान स्थिति

इस घोटाले के संबंध में देश के विभिन्न राज्यों में पुलिस और CBI द्वारा कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। हालांकि, इस मामले का मुख्य आरोपी और सागा ग्रुप का सीएमडी समीर अग्रवाल वर्तमान में देश से फरार है। वहीं, उसके एक प्रमुख सहयोगी रवि शंकर तिवारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के बाद इस मामले में और भी बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।