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कंज्यूमर फोरम ने मैरिज ब्यूरो को सेवा में कमी के लिए दोषी ठहराया

कन्नूर में एक उपभोक्ता फोरम ने एक मैरिज ब्यूरो को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। शिकायतकर्ता ने 3,000 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस जमा की थी, लेकिन ब्यूरो ने कोई उपयुक्त विवाह प्रस्ताव नहीं दिया। आयोग ने ब्यूरो को फीस लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो निजी सेवाओं का उपयोग करते हैं।
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विशेषज्ञों की चेतावनी


Marriage Bureau, केरल: कन्नूर में एक उपभोक्ता फोरम ने एक मैरिज ब्यूरो को सेवा में कमी का दोषी पाया है। इस मामले में ग्राहक को उसकी रजिस्ट्रेशन फीस लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। शिकायतकर्ता ने ब्यूरो में पंजीकरण के लिए 3,000 रुपए की फीस जमा की थी।


शिकायत का विवरण

शिकायत में कहा गया कि शुल्क लेने के बावजूद ब्यूरो ने न तो कोई प्रभावी प्रयास किए और न ही विवाह के लिए उपयुक्त प्रस्ताव उपलब्ध कराए। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।


उपभोक्ता आयोग का निर्णय

मामले की सुनवाई के बाद, जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि मैरिज ब्यूरो ने अपनी सेवा की जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में कमी माना।


आयोग ने मैरिज ब्यूरो को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 3,000 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस वापस करे। इसके अलावा, मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 3,000 रुपए का मुआवजा और 2,000 रुपए मुकदमे का खर्च भी अदा करे।


भुगतान में देरी पर ब्याज

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मैरिज ब्यूरो तय समय सीमा के भीतर शिकायतकर्ता को पूरी राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे निर्धारित दर से ब्याज के साथ रकम चुकानी होगी। यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो मैरिज ब्यूरो जैसी निजी सेवाओं का उपयोग करते हैं।


आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया कि शुल्क लेने के बाद सेवा उपलब्ध कराना संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी है। यदि कोई संस्था वादा पूरा नहीं करती या लापरवाही बरतती है, तो उपभोक्ता को न्याय पाने का पूरा अधिकार है।