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कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट: ट्रंप के बयान का प्रभाव

डॉनल्ड ट्रंप के ईरान में नए हमले रोकने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 डॉलर की कमी आई है, जिससे भारत पर इसका संभावित प्रभाव पड़ सकता है। यदि कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं, तो इससे आयात खर्च में कमी और महंगाई पर नियंत्रण संभव है। जानें इस घटनाक्रम का विस्तृत विश्लेषण और भारत की स्थिति पर इसके प्रभाव के बारे में।
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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान में नए हमलों को रोकने की घोषणा की है, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल 4 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। ट्रंप ने ईरान के साथ एक तात्कालिक समझौते की इच्छा व्यक्त की है, जिसमें तेहरान की परमाणु योजनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का मुद्दा शामिल है।


3 अगस्त को कच्चे तेल की कीमत

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 4.37 डॉलर या 5% घटकर 83.56 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इसी तरह, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियट क्रूड की कीमत 4.63 डॉलर या 5.5% गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।


भारत पर संभावित प्रभाव

भारत अपनी आवश्यकताओं का 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इस प्रकार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बनी रहती हैं, तो इससे आयात खर्च में कमी आ सकती है और महंगाई की दर में वृद्धि की संभावना कम हो सकती है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की आशंका भी नहीं रहेगी। इसलिए, भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की हर गतिविधि पर ध्यान देता है।


जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 23% की वृद्धि हुई थी, लेकिन सोमवार को यह 5% से अधिक गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। इस घटनाक्रम के बीच OPEC+ के प्रमुख उत्पादकों ने उत्पादन कोटा में मामूली वृद्धि को मंजूरी दी है, जिससे 2023 में की गई उत्पादन कटौती को वापस लेने की योजना पूरी हो गई है।


ट्रंप का समाधान की अपील

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब और अन्य मध्य पूर्वी सहयोगियों ने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान की अपील की है और होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द खोलने का समर्थन किया है। पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से अंतरिम शांति समझौता बाधित हुआ, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई।