कफ सिरप की खरीद पर नया नियम: डॉक्टर की पर्ची अब अनिवार्य
नई दिल्ली में कफ सिरप की बिक्री पर नया नियम
नई दिल्ली: अब से, कफ सिरप को सीधे केमिस्ट से खरीदना संभव नहीं होगा, जब तक कि आपके पास डॉक्टर की पर्ची न हो। केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन कर इस नियम को लागू किया है। इसका उद्देश्य देशभर में सिरप आधारित दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखना है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम
यह निर्णय तब लिया गया है जब भारत सहित कई देशों में मिलावटी कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब खांसी की सिरप को अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की तरह नियंत्रित किया जाएगा।
नियम में क्या बदलाव हुआ है
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शेड्यूल K के सीरियल नंबर 13 में संशोधन किया है। पहले, 1000 से कम जनसंख्या वाले गांवों में कफ सिरप को बिना पर्ची बेचा जा सकता था, लेकिन अब 'सिरप' शब्द को हटा दिया गया है।
इसका अर्थ है कि अब कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही उपलब्ध होंगी। केमिस्ट अपनी मर्जी से कोई भी सिरप नहीं दे सकेंगे।
कफ सिरप की खरीद प्रक्रिया
हालांकि, इस पर कोई बैन नहीं लगाया गया है, लेकिन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब फार्मेसी से सिरप लेने के लिए डॉक्टर का पर्चा दिखाना आवश्यक होगा। मंत्रालय ने निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स रूल्स 1945 के लाइसेंसिंग नियमों का पालन करें।
बाजार पर प्रभाव
भारत में कफ सिरप का बाजार काफी बड़ा है, जो 2024 तक लगभग 21,800 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में यह 32.8 करोड़ डॉलर का हो सकता है और 2035 तक 65 करोड़ डॉलर से अधिक जाने की संभावना है। हर साल बाजार में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। नए नियमों से ओवर-द-काउंटर बिक्री में कमी आएगी, लेकिन इससे नकली और खतरनाक सिरप की बिक्री पर रोक लगेगी।
इस निर्णय की आवश्यकता
डॉक्टर की सलाह के बिना, केमिस्ट अक्सर मुनाफे के अनुसार कोई भी सिरप दे देते थे। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीली कफ सिरप पीने से लगभग 25 बच्चों की मौत हो गई थी। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। IMA के अध्यक्ष डॉ. अनिल नायक का कहना है कि अधिकांश सिरप में थोड़ी मात्रा में कैफीन होती है, जिसका लोग नशे के लिए भी उपयोग करते हैं।
कोकून हॉस्पिटल के डॉ. जितेंद्र जैन के अनुसार, खांसी स्वयं एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह वायरल, एलर्जी, अस्थमा या निमोनिया का लक्षण हो सकती है। बिना जांच के सिरप देना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह से सही निदान, सही दवा और सही डोज मिल सकेगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए यह बदलाव आवश्यक माना जा रहा है।
