कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, सिंचाई में होगी कठिनाई
किसानों की चिंता
इस वर्ष मानसून में बारिश की कमी के चलते किसानों को आने वाले समय में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। भाखड़ा और पौंग बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में जल स्तर काफी कम है, और पानी का इनफ्लो भी कमजोर हो गया है। इससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रबी सीजन के लिए सिंचाई का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों में इस बात को लेकर चिंता है कि इससे गेहूं जैसी फसलों की पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पानी की मांग में कमी
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने तीनों राज्यों से पानी की मांग को तर्कसंगत बनाने और आवश्यकता के अनुसार घटाने की अपील की है। बोर्ड की चिंता इस बात को लेकर है कि मानसून के बाद बांधों में पानी भरने का मुख्य स्रोत समाप्त हो गया है। अब बारिश का पानी बांधों में नहीं आ रहा है और जल भंडारण कम हो गया है। आने वाले महीनों में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए उपलब्ध पानी का सही प्रबंधन आवश्यक होगा।
आंकड़ों का विश्लेषण
बीबीएमबी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 को भाखड़ा बांध का जल स्तर 1,632.70 फीट था। इस समय पानी का इनफ्लो और निकासी दोनों 8,400 क्यूसेक दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बांध में जितना पानी आ रहा था, उतना ही छोड़ा भी जा रहा था। पौंग बांध का जल स्तर 1,359.47 फीट था, जहां इनफ्लो 3,079 क्यूसेक और निकासी 9,018 क्यूसेक थी।
पिछले वर्ष की तुलना
15 सितंबर 2026 को भाखड़ा बांध में 4.03 BCM लाइव स्टोरेज था, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.44 BCM कम है। पौंग बांध में भी इसी दिन लाइव स्टोरेज 4.54 BCM था, जबकि पिछले वर्ष यह 5.96 BCM था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में पानी की उपलब्धता कम है।
सिंचाई पर प्रभाव
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान कृषि प्रधान राज्य हैं, और इन राज्यों के लिए गेहूं और अन्य रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। पंजाब ने लगभग 30,000 क्यूसेक पानी की मांग की है, जिसमें भाखड़ा प्रणाली से 20,000 क्यूसेक और रावी-ब्यास प्रणाली से 10,000 क्यूसेक शामिल हैं।
बीबीएमबी की चेतावनी
बीबीएमबी ने तीनों राज्यों को चेतावनी दी है कि उपलब्ध जल भंडार का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है, क्योंकि अगले वर्ष मई-जून में सिंचाई और पेयजल की मांग बढ़ सकती है। बोर्ड ने राज्यों को सलाह दी है कि वे पानी की मांग को तर्कसंगत बनाएं और जलवायु के अनुकूल फसलों पर विचार करें।
