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कर्नाटक में सरकारी डॉक्टर पर PG कोर्स के दौरान वेतन लेने का आरोप

कर्नाटक के बागलकोट में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर आरोप है कि उन्होंने नम्मा क्लीनिक में काम करते हुए एक निजी मेडिकल कॉलेज में फुल टाइम PG कोर्स किया और हर महीने 70,000 रुपये का वेतन लिया। इस मामले की विभागीय जांच चल रही है, और उनके पिता ने उन्हें ड्यूटी से हटा दिया है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या सरकारी सेवा में रहते हुए PG करना और वेतन लेना नियमों के अनुरूप था। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो वेतन की वसूली भी हो सकती है।
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डॉक्टर पर लगे गंभीर आरोप


डिजिटल डेस्क। कर्नाटक के बागलकोट में एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर, डॉ. अंकिता यरगल, विवादों में घिरी हुई हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने नम्मा क्लीनिक में अपनी सरकारी नौकरी के दौरान एक निजी मेडिकल कॉलेज में फुल टाइम पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थीं और इस दौरान उन्हें हर महीने लगभग 70,000 रुपये का वेतन मिलता रहा। इस मामले की जांच अब विभागीय स्तर पर की जा रही है।


परिवारिक संबंध और कार्रवाई

डॉ. अंकिता, बागलकोट के विधायक उमेश मेटी की भतीजी और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यरगल की बेटी हैं। मामले के उजागर होने के बाद उनके पिता ने उन्हें ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी सैलरी फिलहाल रोक दी गई है।


क्लीनिक में मरीजों को हुई परेशानी

कर्नाटक में सरकारी डॉक्टर पर PG कोर्स के दौरान वेतन लेने का आरोप


डॉक्टर की अनुपस्थिति से मरीजों को दिक्कतें


यह विवाद बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक से संबंधित है, जहां डॉ. अंकिता मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। अधिकारियों के अनुसार, 3 मार्च से सितंबर तक उनकी अनुपस्थिति की शिकायतें आई हैं।


कॉलेज की अनुमति का मामला

ड्यूटी से अनुपस्थिति का सवाल


जिला पंचायत के नोटिस के अनुसार, SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. अंकिता को PG की पढ़ाई करने की अनुमति दी थी। लेकिन प्रशासन का कहना है कि कॉलेज की मंजूरी नम्मा क्लीनिक की ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की अनुमति नहीं है। इस कारण जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य सेवा में काम करते हुए फुल टाइम PG करना और उसी समय वेतन लेना नियमों के अनुरूप था। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उन्हें मिले वेतन की वसूली का भी सवाल उठ सकता है।


सुनवाई में अनुपस्थिति

डॉक्टर को अगली सुनवाई के लिए बुलाया गया


बागलकोट जिला पंचायत के CEO गजानन बाले ने मामले की सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की थी, लेकिन डॉ. अंकिता वहां उपस्थित नहीं हुईं। अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया गया है।


जांच का दायरा

संभावित कार्रवाई की तैयारी


अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद यदि आवश्यक हुआ तो मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल और नेशनल मेडिकल कमीशन को भेजा जा सकता है। इसके अलावा, विभागीय कार्रवाई और कथित अवधि में किए गए भुगतान की वसूली पर भी निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल, डॉ. अंकिता के खिलाफ आरोप जांच के स्तर पर हैं। अंतिम कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में उनकी ड्यूटी, PG पाठ्यक्रम और वेतन से संबंधित क्या तथ्य सामने आते हैं।