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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की अर्ज़ी को किया खारिज

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा पार्टी धन के उपयोग के लिए दायर की गई अर्ज़ी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पूजा की छुट्टियों के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत की जाएगी। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पुलिस ने पार्टी के खातों में वित्तीय अनियमितताओं की जांच की। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की कानूनी चुनौतियों के बारे में।
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तृणमूल कांग्रेस की अर्ज़ी पर उच्च न्यायालय का निर्णय


कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस द्वारा पार्टी के धन के उपयोग के लिए की गई तत्काल सुनवाई की याचिका को अस्वीकार कर दिया है।


न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पूजा की छुट्टियों के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत इस मामले की सुनवाई की जाएगी।


तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार की अध्यक्षता में एक समिति ने त्योहारों से पहले आवश्यक खर्चों के लिए धन जारी करने से इनकार कर दिया है। विशेष अधिकारी ने इस संबंध में लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है कि क्या चुनाव आयोग का आदेश, जिसमें पार्टी के नाम और 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न के उपयोग पर रोक लगाई गई थी, केवल उपचुनावों के लिए है या यह अनिश्चितकाल तक लागू रहेगा।


यह विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस ने एक निजी बैंक में तृणमूल कांग्रेस के तीन खातों से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं पर कार्रवाई की। खातों के बंद होने के बाद मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा। अदालत ने 9 जुलाई को निर्देश दिया था कि ममता बनर्जी का तृणमूल कांग्रेस का अगले साल 29 जनवरी तक खातों पर पूरा नियंत्रण नहीं होगा, लेकिन रोज़मर्रा की संगठनात्मक गतिविधियों और कर्मचारियों के वेतन के लिए आवश्यक धन विशेष अधिकारी के माध्यम से जारी किया जाना चाहिए।


एक नई कानूनी चुनौती तब उत्पन्न हुई जब चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और रिताब्रत बनर्जी गुटों को 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न का अस्थायी रूप से उपयोग करने से रोक दिया। राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने उस नाम से पार्टी के कानूनी अस्तित्व को निलंबित कर दिया था, इसलिए उस नाम से दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी।