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कांग्रेस अध्यक्ष पर BJP के जमीन घोटाले के आरोप: क्या है सच?

हाल ही में, BJP ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार पर जमीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि खड़गे परिवार ने कर्नाटक में 100 करोड़ रुपये की भूमि एक ट्रस्ट के माध्यम से हड़पी है। इस मामले में कई सवाल उठाए गए हैं, जैसे कि ट्रस्ट को इतनी महत्वपूर्ण भूमि कैसे दी गई। BJP ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का हवाला देते हुए इस मामले को गंभीर बताया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के तथ्य।
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कांग्रेस अध्यक्ष पर BJP के जमीन घोटाले के आरोप: क्या है सच?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से जुड़ा मामला

हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ जुड़े जमीन घोटाले का मामला सुर्खियों में है। इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। BJP का दावा है कि खड़गे परिवार ने कर्नाटक में लगभग 100 करोड़ रुपये की जमीन हड़पी है, और यह सब एक ट्रस्ट के माध्यम से किया गया है। इस मामले में प्रियांक खड़गे का नाम भी शामिल किया गया है।


BJP के आरोपों का विवरण

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि खड़गे परिवार का ट्रस्ट निजी है, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियांक खड़गे, उनकी पत्नी और दामाद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट को कर्नाटक में कई भूमि आवंटित की गई हैं, जो सत्ता के दुरुपयोग से प्राप्त की गई हैं।


क्या है BJP का आरोप?

BJP ने यह भी कहा कि कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) ने 2024 में सिद्धार्थ विहारा ट्रस्ट को 5 एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटित की। पार्टी का कहना है कि यह भूमि एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए दी गई थी, जिसकी बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये है। BJP ने सवाल उठाया कि जिस ट्रस्ट का एयरोस्पेस या डिफेंस रिसर्च से कोई संबंध नहीं था, उसे इतनी महत्वपूर्ण भूमि कैसे दी गई।


19 एकड़ भूमि आवंटन का आरोप

BJP ने यह भी आरोप लगाया कि 2016 में, जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी, तब सिद्धार्थ विहारा ट्रस्ट को गुलबर्गा जिले में 19 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। यह भूमि पाली भाषा के शोध और विकास के नाम पर दी गई थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि एक ही ट्रस्ट अलग-अलग क्षेत्रों में शोध के नाम पर इतनी बड़ी मात्रा में भूमि कैसे प्राप्त कर सकता है।


भ्रष्टाचार कानून का संदर्भ

BJP ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उल्लेख किया। भंडारी ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर इस कानून की धारा 13(1)A और 13(1)B के तहत आता है। उनके अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके अपने या अपने परिवार के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करता है, तो यह भ्रष्टाचार माना जाता है। BJP ने मल्लिकार्जुन खड़गे से यह भी पूछा कि उनके ट्रस्ट ने ऐसा कौन सा अनुसंधान किया था, जिसके आधार पर उन्हें इतनी मूल्यवान सरकारी भूमि दी गई।