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कांग्रेस का आरोप: नई योजना से ग्रामीण मजदूरों के हक पर संकट

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि नई योजना VB-G RAM G के तहत ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। जयराम रमेश ने महाराष्ट्र के बीड जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि कागजों पर हजारों मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में कोई मौजूद नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि यह समस्या कई राज्यों में फैली हुई है और यह योजना पंचायतों के अधिकारों को छीनने का एक साधन बन गई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा जा रहा है और सरकार के आंकड़े क्या दर्शाते हैं।
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कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया है कि मनरेगा को समाप्त कर नई योजना 'VB-G RAM G' लाना ग्रामीण गरीबों के सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर गंभीर हमला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में कहा कि इस नई व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों और मजदूरी की व्यवस्थित तरीके से चोरी की जा रही है। उन्होंने महाराष्ट्र के बीड जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कागजों पर हजारों मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में कार्यस्थलों पर कोई श्रमिक नहीं है और स्थानीय नेताओं द्वारा फर्जीवाड़े के जरिए उनकी मजदूरी हड़पी जा रही है.


समस्या का विस्तार

कांग्रेस का कहना है कि यह समस्या केवल बीड जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों से फर्जी हाजिरी और क्लोन ऐप जैसे घोटालों की रिपोर्टें आ रही हैं। उनका तर्क है कि 1 जुलाई से लागू हुआ यह नया कानून तकनीक के नाम पर जरूरतमंदों को काम से बाहर करने, पंचायतों के अधिकारों को छीनने और सभी शक्तियों को केंद्र में समेटने का एक साधन बन गया है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि लगभग दो दशक पुरानी मनरेगा योजना को बंद करके सरकार ने संकट के समय ग्रामीणों का सबसे बड़ा सहारा छीन लिया है।


क्या कहते हैं आंकड़े?

ग्रामीण रोजगार की नई योजना, विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के तहत 24 सितंबर 2026 तक देशभर में 97.17 लाख कार्य चल रहे थे। वर्तमान में लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतें इस योजना के तहत काम करवा रही हैं। यह योजना 1 जुलाई 2026 से लागू है.


कितने मजदूरों को मिल रहा है काम?

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2026-27 में अब तक 10.88 करोड़ सक्रिय मजदूरों का पंजीकरण हुआ है। 31.69 करोड़ से अधिक कार्यदिवस बने हैं। 2.81 करोड़ से अधिक मजदूर मांग पर काम प्राप्त कर रहे हैं, जो लगभग 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों से आते हैं। कुल 15.17 करोड़ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किए गए हैं। महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत है। मजदूरी की दर 300 रुपये से 450 रुपये प्रतिदिन के बीच है.


कैसे बनती है गांव की योजना?

कानून के अनुसार, हर ग्राम पंचायत को विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) बनानी होती है। यह योजना ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की भागीदारी से तैयार होती है। ग्राम सभा इसकी सिफारिश करती है और इसे मंजूरी देती है। पहले गांव की मौजूदा संपत्तियों और कमियों की सूची बनाई जाती है। जरूरत के अनुसार काम तय किए जाते हैं.


निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया

सरकार के अनुसार, ई-केवाईसी और हाजिरी चेहरे और बायोमेट्रिक पहचान के माध्यम से दर्ज की जाती है। कार्यों की जियो-टैगिंग की जाती है और ई-मेजरमेंट बुक का उपयोग किया जाता है। भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाता है। निगरानी के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड और AI आधारित विश्लेषण का भी उपयोग किया जा रहा है.