कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया, राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
संसद में विपक्ष का विरोध
नई दिल्ली - संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में कांग्रेस के सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को फिर से उठाया। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक मंत्री को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक वे किसी भी चर्चा में भाग नहीं लेंगे। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुझावों पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।
राहुल गांधी का आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। संसदीय परंपरा के अनुसार, यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है, तो उसे जवाब देने का अधिकार होता है। लेकिन जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देने की कोशिश की, तो उनका माइक बंद कर दिया गया।
छात्रों की मांगें
राहुल गांधी ने विपक्ष की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाया जाए। दूसरी, छात्रों पर की गई कथित कार्रवाई और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। तीसरी, प्रधानमंत्री मोदी को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री को नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष किसी चर्चा में शामिल नहीं होगा।
नीट पेपर लीक पर चर्चा
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने नीट पेपर लीक मामले पर गंभीर बहस की आवश्यकता जताई। उन्होंने सरकार से स्पष्टता मांगी कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा संपन्न होने तक पेपर लीक को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। उनके अनुसार, छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों या विपक्ष की ओर से फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग नहीं उठाई गई थी। जिन मुद्दों की मांग नहीं की गई, उन पर प्रधानमंत्री बात कर रहे हैं, जबकि वास्तविक मांगों पर सरकार का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
जवाबदेही की आवश्यकता
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने प्रधानमंत्री से संसद में उपस्थित होकर इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 150 से अधिक बार विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इस विषय को पहले भी संसद में उठाया गया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
