Newzfatafatlogo

काशी में मणिकर्णिका घाट पर स्वच्छता अभियान का आयोजन

काशी के मणिकर्णिका घाट पर सोमवार को स्वच्छता और श्रमदान का विशेष अभियान चलाया गया। नमामि गंगे और नगर निगम की टीम ने घाट की सफाई की और श्रद्धालुओं से पवित्रता बनाए रखने की अपील की। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने घाट की सफाई के महत्व पर जोर दिया और लोगों को जागरूक किया कि वे स्नान के बाद कपड़े और पूजन सामग्री गंगा में न छोड़ें। इस अभियान का उद्देश्य गंगा की स्वच्छता को सभी की जिम्मेदारी बताना था।
 | 

स्वच्छता और श्रमदान का विशेष अभियान

वाराणसी। सोमवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्वच्छता और श्रमदान का एक विशेष अभियान आयोजित किया गया। नमामि गंगे और नगर निगम वाराणसी की संयुक्त टीम ने घाट परिसर की सफाई की और श्रद्धालुओं से तीर्थस्थलों की पवित्रता बनाए रखने की अपील की। इस दौरान गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने भी श्रमदान में भाग लिया। उन्होंने मणिकर्णिका घाट को काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बताते हुए कहा कि यहां सेवा करना केवल सफाई का कार्य नहीं, बल्कि एक बड़ा सत्कर्म है।


गंगा की तलहटी से निकला कचरा

गंगा की तलहटी से निकला था करीब 100 किलो कचरा

इससे पहले सितंबर में गंगा का जलस्तर घटने के बाद मणिकर्णिका घाट पर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया गया था। उस समय घाट के किनारों से लगभग 100 किलो कपड़े और अन्य कचरा निकाला गया था। सफाई टीम ने पॉलिथीन और अन्य सामग्री को भी एकत्र कर हटाया।


जागरूकता का संदेश

गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद घाटों पर सिल्ट, प्लास्टिक और पुराने कपड़े जमा हो जाते हैं। इसलिए घाटों की सफाई के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्नान या धार्मिक अनुष्ठान के बाद कपड़े, पॉलिथीन और पूजन सामग्री गंगा में नहीं छोड़ने की अपील की।


गंगा की स्वच्छता की जिम्मेदारी

‘गंगा की स्वच्छता सभी की जिम्मेदारी’

इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि गंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान और जीवन से जुड़ी नदी है। इसे स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए जनभागीदारी और व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी आवश्यक है।