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कृषि क्षेत्र में केंद्र-राज्य सहयोग की आवश्यकता: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस में कृषि क्षेत्र के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए और वैज्ञानिकों की रिसर्च को किसानों तक पहुंचाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने किसानों को उनकी मातृभाषा में सलाह देने की योजना का भी उल्लेख किया। कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठे।
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कृषि कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण सुझाव

हैदराबाद/नई दिल्ली - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में राज्यों से कृषि क्षेत्र के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक और किसान मिलकर एक 'टीम एग्रीकल्चर' का हिस्सा हैं। यदि कॉन्फ्रेंस में तय कार्यों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह पूरी प्रक्रिया व्यर्थ हो जाएगी।


शिवराज ने एग्री स्टैक और फार्मर आईडी के कार्य को तेजी से पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भविष्य में कृषि क्षेत्र की कई व्यवस्थाएं फार्मर आईडी पर निर्भर करेंगी। इसके अलावा, लैंड पार्सल को किसान रजिस्ट्री से जोड़ने और लैंड रिकॉर्ड डेटा के समन्वय का कार्य भी राज्यों को शीघ्र पूरा करना होगा। दक्षिणी राज्यों में किरायेदार किसानों के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।


उन्होंने कहा कि 'भारत विस्तार' के माध्यम से किसानों को उनकी मातृभाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध यह सुविधा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू की जाएगी। किसान अपनी भाषा में सवाल पूछकर उसी भाषा में उत्तर प्राप्त कर सकेंगे।


केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों को किसानों के बीच लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों में होने वाली रिसर्च का लाभ खेतों तक पहुंचना चाहिए। राज्यों द्वारा 15-20 दिन के अभियान की तारीख तय करने पर भारत सरकार के वैज्ञानिक किसानों के बीच संवाद करेंगे।


शिवराज ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी और फूड बास्केट बनाना है। इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसानों को मिलकर कार्य करना होगा।


उन्होंने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली के पूसा संस्थान में रबी कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें राज्य अपने रबी सीजन के फसलवार योजनाओं को प्रस्तुत करेंगे और बुवाई क्षेत्र के आधार पर बीज, उर्वरक और अन्य संसाधनों की आवश्यकता का आकलन करेंगे।


बड़े राज्यों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल


क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। दोनों राज्यों के कृषि मंत्री भी बैठक में शामिल नहीं हुए।