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केंद्र सरकार का ई20 प्रोग्राम: पूर्व बीपीसीएल निदेशक का बयान

केंद्र सरकार का ई20 प्रोग्राम एक योजनाबद्ध पहल है, जिसमें पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण शामिल है। पूर्व बीपीसीएल निदेशक आर. रामचंद्रन ने इस योजना के कार्यान्वयन के पीछे की प्रक्रिया और सभी संबंधित पक्षकारों की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने ई85 के भविष्य में संभावित उपयोग और उद्योगों को पानी की बचत के लिए अपनाने वाली तकनीकों पर भी चर्चा की। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया है।
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ई20 प्रोग्राम की योजना और कार्यान्वयन

मुंबई: केंद्र सरकार का ई20 प्रोग्राम पूरी तरह से योजनाबद्ध है, जिसमें पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण कई वर्षों की चर्चा के बाद लागू किया गया है। इसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एथेनॉल उत्पादक, ऑटोमोबाइल उद्योग, वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन शामिल हैं। यह जानकारी पूर्व बीपीसीएल निदेशक (रिफाइनरी) आर. रामचंद्रन ने साझा की।


आर. रामचंद्रन ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में बताया कि ई20 के कार्यान्वयन से पहले तकनीकी, परिचालन और नीतिगत पहलुओं पर विचार किया गया है।


उन्होंने कहा, "ई20 एथेनॉल मिश्रण पहल एक अच्छी तरह से सोची-समझी प्रक्रिया है, जिसमें सभी पक्षकारों—तेल कंपनियां, एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां, ऑटोमोबाइल उद्योग, वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन—शामिल रहे हैं।"


ई85 के संदर्भ में, रामचंद्रन ने स्पष्ट किया कि यह वर्तमान में किसी सरकारी नीति का हिस्सा नहीं है।


उन्होंने कहा, "ई85 अभी किसी सरकारी नीति का हिस्सा नहीं है, इसे भविष्य के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह विचार ब्राजील जैसे देशों से प्रेरित है, जहां ई100 को फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक के साथ उपयोग किया जाता है।"


भविष्य में औद्योगिक विस्तार के दौरान पानी के उपयोग को लेकर चिंताओं पर उन्होंने कहा कि उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पानी की बचत को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।


उन्होंने लगभग 100 प्रतिशत पानी की रीसाइक्लिंग, ट्रीट किए गए वेस्टवॉटर का अधिकतम उपयोग और औद्योगिक-ग्रेड पानी बनाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस और डिमिनरलाइजेशन प्लांट जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।


इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग पानी की अधिक खपत वाली प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक कूलिंग सिस्टम अपनाएं, जिनमें एयर-बेस्ड, कंप्रेस्ड-एयर और चिल्ड-एयर तकनीक शामिल हैं।


भारत की ऊर्जा सुरक्षा के बारे में रामचंद्रन ने कहा कि देश की मजबूती कई कारणों से है, जिसमें पिछले पांच-छह वर्षों में कच्चे तेल के आयात बास्केट में विविधता लाना शामिल है।


उन्होंने बताया कि भारतीय तेल उद्योग ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर तेल खरीदने के विकल्पों को बढ़ाया है, जिससे देश वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल प्राप्त कर सकता है और सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों का सामना कर सकता है।