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केंद्र सरकार का पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून

केंद्र सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए एक नया कानून पेश किया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 का प्रस्ताव रखा। इस बिल के माध्यम से छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा की जाएगी। जानें इस बिल की मुख्य बातें, जिसमें पेपर लीक की जांच की समय सीमा और दंड का प्रावधान शामिल है।
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नई दिल्ली में पेपर लीक रोकने के लिए कानून का प्रस्ताव

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए एक सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 30 जुलाई को राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया। यह बिल पहले ही लोकसभा में 10 घंटे की बहस के बाद पारित हो चुका है।

जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह विधेयक छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने राज्यसभा के सदस्यों से इस बिल पर गंभीर चर्चा करने की अपील की।


विपक्ष पर आरोप

जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर लगाया आरोप:

जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे इस बिल का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके निजी हित इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि UPA शासन और 2014 के बाद विपक्ष शासित राज्यों में कई पेपर लीक हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में दशकों तक पेपर लीक रोकने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था, जबकि मोदी सरकार ने 2024 में ऐसा कानून बनाया।


NTA और परीक्षा सुधार

NTA और परीक्षा सुधार:

मंत्री ने बताया कि भारत में चार प्रमुख भर्ती और परीक्षा संगठन हैं, जिनमें UPSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS और NTA शामिल हैं। NTA का विचार सबसे पहले 1992 में आया था, जब कांग्रेस सत्ता में थी। कई समितियों ने इसकी सिफारिश की, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अधूरे काम को पूरा किया। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि वे 33 साल तक NTA क्यों नहीं बना सके?


बिल की मुख्य बातें

क्या है बिल की मुख्य बातें:

  • पेपर लीक की जांच 2 महीने में पूरी करनी होगी।

  • सामान्य पेपर लीक में 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख तक जुर्माना।

  • संगठित पेपर लीक (ऑर्गनाइज्ड क्राइम) में 7 साल से कम नहीं जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना।

  • राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे।

  • चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के अंदर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य।

  • केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स बना सकती है।