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केंद्र सरकार की नई योजना से ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए VB-G RAM G योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दी गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राशि मिली है। योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और इसका वित्तीय ढांचा मनरेगा से अलग होगा। जानें इस योजना के बारे में और कैसे यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को सशक्त बनाएगी।
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केंद्र सरकार की नई योजना से ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए नया कदम

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' या VB-G RAM G योजना के तहत राज्यों को अंतरिम वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस योजना के तहत कुल 95,692.31 करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट आवंटित किया गया है, जिसमें सबसे अधिक राशि उत्तर प्रदेश को 9,721.48 करोड़ रुपये मिली है, जबकि पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।


धनराशि का आवंटन और लक्ष्य

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि धनराशि का वितरण पिछले वर्ष मनरेगा के तहत खर्च के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और श्रमिकों को नियमित कार्य उपलब्ध कराना है।


नई योजना का कार्यान्वयन

केंद्र सरकार की नई योजना से ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा


ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में नई योजना के कार्यान्वयन के लिए मसौदा नियम जारी किए हैं। प्रस्तावित VB-G RAM G योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होने की योजना है। हालांकि, नियमों को अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है, लेकिन राज्यों को तैयारी के लिए अंतरिम धनराशि जारी कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।


वित्तीय ढांचे में बदलाव

नई योजना का वित्तीय ढांचा मनरेगा से भिन्न होगा। मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता था, जबकि VB-G RAM G एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च साझा करेंगे। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रहेगा, जबकि बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।