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केंद्र सरकार की स्थिति में बदलाव: प्रदर्शन और बिलों पर नई चुनौतियाँ

केंद्र सरकार की स्थिति में हालिया बदलावों ने राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या और विपक्षी दलों की सक्रियता ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। जानें कैसे सोनम वांगचुक के मामले और परिसीमन बिल पर चर्चा ने सरकार की रणनीतियों को चुनौती दी है। क्या सरकार अपनी स्थिति को मजबूत कर पाएगी या विपक्ष को नैतिक जीत मिलेगी? इस लेख में जानें सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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केंद्र सरकार की बहुमत की स्थिति में बदलाव

कुछ समय पहले तक यह माना जा रहा था कि केंद्र की सरकार आसानी से दो तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी। आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), और शिवसेना (UBT) में टूट के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार किसी तरह बहुमत जुटा लेगी। लेकिन हाल के दिनों में स्थिति में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के जेल जाने के बाद उन्हें पद से हटाने का बिल भी पास किया जा सकता है, लेकिन अब यह भी टल गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार पर भी सवाल उठने लगे हैं।


विपक्षी दलों का प्रदर्शन

सोमवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्षी दलों के सांसद, जो पहले सत्ता पक्ष के करीब थे, अब अपने विचार बदल सकते हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और अन्य दलों के बीच चर्चाएं भी थम सकती हैं। एक कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार केवल तब ही इस बिल को लाना चाहती है जब उसे दो तिहाई बहुमत का भरोसा हो। यही वजह है कि सत्र शुरू होने से पहले जिन 7 बिलों का उल्लेख किया गया, उनमें परिसीमन बिल का नाम नहीं था।


सरकार की बैकफुट पर स्थिति

सोमवार से पहले तक सरकार आत्मविश्वास से भरी हुई थी। सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सरकार को उम्मीद थी कि प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। सोनम वांगचुक को उठाए जाने के 24 घंटे के भीतर जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ गई। पुलिस के सभी इंतजाम विफल हो गए और युवाओं की भीड़ ने सरकार को बातचीत के लिए मजबूर कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ताओं ने बताया कि सरकार ने सोमवार की सुबह उनसे संपर्क किया।


सरकार की मांगों पर प्रतिक्रिया

लगभग एक महीने से चल रहे इस प्रदर्शन में पहली बार सरकार ने संपर्क किया। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के आवास पर CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी जे पी नड्डा से दो बार मुलाकात हुई, जिसमें ज्ञापन लिया गया। हालांकि, बाद में CJP प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बातचीत केवल समय की बर्बादी साबित हुई। उन्होंने जे पी नड्डा के सामने तीन मांगें रखीं: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक का अस्पताल से डिस्चार्ज, और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा। लेकिन सरकार ने इन पर कोई आश्वासन नहीं दिया।


प्रधानमंत्री का सख्त संदेश

अब मंगलवार को यह कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले में सख्त सजा देने की बात कही है। जे पी नड्डा खुद अस्पताल जाकर प्रदर्शन में घायल लोगों से मिल रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने हाई कोर्ट में यह भी कहा है कि सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने में कोई समस्या नहीं है।


परिसीमन बिल पर सरकार की स्थिति

परिसीमन बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। समस्या यह है कि वह इस बहुमत से काफी दूर है। पिछली बार की कोशिश में यह बिल गिर गया था। इसलिए, सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन उसने खुलकर यह नहीं कहा है कि वह यह बिल फिर से लाएगी। चर्चा है कि सरकार विपक्षी दलों, जैसे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), से संपर्क कर रही है ताकि इसे पास कराया जा सके।


सरकार के संभावित बिल

सरकार ने सत्र की शुरुआत से पहले कुल 7 बिलों का उल्लेख किया था, जिनमें परिसीमन बिल का नाम नहीं था। हालांकि, चर्चा है कि सरकार कम समय में भी नए बिल ला सकती है। इनमें शामिल हैं: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, और अन्य।


विपक्ष की संभावित जीत

यदि CJP का यह नैरेटिव सरकार को बैकफुट पर धकेलने में सफल होता है और परिसीमन बिल रुक जाता है, तो यह विपक्ष के लिए एक बड़ी जीत साबित हो सकती है। पश्चिम बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद विपक्षी खेमे में भगदड़ मच गई है। यदि सरकार पीछे हटती है, तो विपक्ष इसे अपनी नैतिक जीत मान सकता है।