केंद्र सरकार ने एससी-ओबीसी छात्रवृत्ति के लिए निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की
छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय
देशभर के 1.2 करोड़ एससी और ओबीसी छात्रों को मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। इस निर्णय से लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को लाभ होगा।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य छात्रों पर दस्तावेजीकरण का बोझ कम करना और छात्रवृत्ति लाभों तक पहुंच को आसान बनाना है।
छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत
गृह राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए घर लौटने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इससे न केवल छात्रों को, बल्कि उनके माता-पिता को भी परेशानी होती थी।
इस प्रक्रिया में समय और धन की बर्बादी होती थी, और कई बार छात्रों को दलालों को भी पैसे देने पड़ते थे। अब प्रशासनिक जटिलताओं को समाप्त करने से छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
भारत में एससी और ओबीसी छात्रों की संख्या
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति (एससी) के 14.2% और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 35.8% छात्र नामांकित हैं। कुल नामांकन संख्या 4.13 करोड़ है।
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण और जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 30-35% छात्र अपने गृह जिले से बाहर अध्ययन करते हैं।
एससी छात्रों के लिए आय सीमा
सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में मदद करती हैं। एससी छात्रों को (प्री-मैट्रिक) कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए लाभ मिलता है, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है। यह लाभ 10वीं के बाद से लेकर पीएचडी तक की उच्च शिक्षा के लिए भी उपलब्ध है।
ओबीसी छात्रों के लिए आय सीमा
ओबीसी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्तर पर उपलब्ध हैं। यह उन ओबीसी छात्रों के लिए है, जिनकी पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये और 1 लाख रुपये वार्षिक है। ये योजनाएं वरिष्ठ माध्यमिक और आईटीआई कार्यक्रमों से लेकर स्नातकोत्तर और व्यावसायिक डिग्री तक के पाठ्यक्रमों को कवर करती हैं।
