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केरल की तिरूवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा को बड़ा झटका

तिरूवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के लिए एक नई चुनौती सामने आई है। पूर्व पुलिस प्रमुख आर श्रीलेखा ने इस्तीफा देकर भाजपा की मेयर पद की स्थिति को संकट में डाल दिया है। भाजपा ने 49 सीटें जीतकर मेयर बनाया था, लेकिन अब यह निगम खोने का खतरा है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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भाजपा की मेयर पद की स्थिति पर संकट


भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी जब उसने लंबे समय की मेहनत के बाद केरल की राजधानी तिरूवनंतपुरम नगर निगम में मेयर पद हासिल किया। इस नगर निगम में 100 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा ने 49 सीटें जीतीं और एक निर्दलीय पार्षद की सहायता से मेयर का पद प्राप्त किया। लेकिन अब यह निगम खोने का खतरा मंडरा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि भाजपा की एक पार्षद, आर श्रीलेखा, जिन्होंने राज्य की पूर्व पुलिस प्रमुख के रूप में कार्य किया था, ने इस्तीफा दे दिया है।


आर श्रीलेखा, जो केरल की पुलिस महानिदेशक रह चुकी हैं, ने सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा और नगर निगम चुनाव में भाग लिया। उनका उद्देश्य था कि यदि भाजपा जीतती है, तो वे मेयर बनेंगी। हालांकि, जब भाजपा ने चुनाव जीता, तो वीवी राजेश को मेयर बनाया गया। पिछले साल दिसंबर में वे मेयर बने थे। अब, लंबे समय तक चुप रहने के बाद, पूर्व डीजीपी श्रीलेखा ने 30 सितंबर को वीवी राजेश को अपना इस्तीफा भेज दिया। इससे नगर निगम में भाजपा का बहुमत संकट में पड़ सकता है।


हालांकि, भाजपा के लिए एक सकारात्मक पहलू यह है कि कांग्रेस और वामपंथी दोनों बहुमत से काफी दूर हैं और किसी भी स्थिति में एकजुट नहीं हो सकते। तिरूवनंतपुरम में वामपंथी के पास 29 और कांग्रेस के पास 20 पार्षद हैं।