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केरल की युवा नगराध्यक्ष दीया बिनू को अविश्वास प्रस्ताव में मिली हार

केरल की पाला नगरपालिका की 21 वर्षीय नगराध्यक्ष दीया बिनू को हाल ही में अविश्वास प्रस्ताव में हार का सामना करना पड़ा। इस प्रस्ताव के पक्ष में 17 वोट पड़े, जिससे UDF की सत्ता का अंत हो गया। दीया ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं थे। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की कहानी और कैसे वह भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष बनीं।
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दीया बिनू को राजनीतिक झटका


केरल के पाला नगरपालिका की 21 वर्षीय दीया बिनू, जिन्हें भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष माना जाता है, को मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा। अविश्वास प्रस्ताव में हार के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। 26 सदस्यीय नगर परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में 17 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए 14 वोटों की आवश्यकता थी। इस नतीजे के साथ, पाला नगरपालिका में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की लगभग छह महीने पुरानी सरकार का अंत हो गया, जिससे स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई।


कांग्रेस में बगावत का असर

अविश्वास प्रस्ताव को लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने पेश किया था, लेकिन कांग्रेस के बागी पार्षदों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चार कांग्रेस पार्षदों ने पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। उपाध्यक्ष माया राहुल ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके अलावा, जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी व्हिप के बावजूद दो कांग्रेस पार्षद मतदान से अनुपस्थित रहे। केरल कांग्रेस के तीन और केरल डेमोक्रेटिक पार्टी के एक पार्षद ने भी मतदान में भाग नहीं लिया, जिससे UDF के भीतर गहरे मतभेदों का पता चला।


दीया बिनू का बयान

पद से हटने के बाद, दीया बिनू ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन इसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, सरकारी आदेशों के उल्लंघन या किसी भी गैरकानूनी कार्य का कोई ठोस आरोप नहीं था। उनका कहना था कि प्रस्ताव लाने वाले और उसका समर्थन करने वाले सदस्य उनके खिलाफ कोई तथ्यात्मक आरोप साबित नहीं कर सके।


कैसे बनीं दीया बिनू नगराध्यक्ष

नगर निकाय चुनाव के बाद, दीया बिनू के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय निर्दलीय समूह को UDF का समर्थन मिला, जिसके बाद वह पाला नगरपालिका की अध्यक्ष बनीं। इस प्रकार, वह भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष के रूप में चर्चित हुईं। अर्थशास्त्र में स्नातक दीया बिनू उस समय उच्च शिक्षा की तैयारी कर रही थीं। उनके पिता बिनू पुलिक्कंदम और चाचा बीजू भी चुनाव जीतकर नगर परिषद में पहुंचे, जिससे तीन सदस्यीय निर्दलीय समूह का गठन संभव हुआ। हालांकि, अब अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी राजनीतिक यात्रा को बड़ा झटका लगा है, जिसे केरल की स्थानीय राजनीति में UDF के लिए महत्वपूर्ण नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।