केरल पुलिस ने घरेलू हिंसा के खिलाफ 'स्पीक अप' कार्यबल की शुरुआत की
केरल पुलिस की नई पहल
केरल पुलिस ने घरेलू हिंसा को रोकने और पीड़ितों को सुरक्षा, कानूनी सहायता और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए 'स्पीक अप' नामक एक विशेष कार्यबल की स्थापना की है।
इस पहल की जिम्मेदारी पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अजिथा बेगम (आईपीएस) को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को प्रोत्साहित करना है जो घरेलू हिंसा का सामना कर रही हैं, ताकि वे अपनी चुप्पी तोड़ सकें और सहायता मांग सकें। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि 'स्पीक अप' का संदेश यह है कि महिलाओं को चुपचाप सहन नहीं करना चाहिए और पुलिस घरेलू हिंसा के मामलों में कठोर कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा एक खामोश हत्यारा है जो महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से समाप्त कर देता है। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी महिला आर्थिक या पारिवारिक डर के कारण न्याय से वंचित न रहे। यह पहल घरेलू हिंसा को रोकने, पीड़ितों को कानूनी सहायता और काउंसलिंग प्रदान करने, और सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगी।
यह उन महिलाओं के लिए भी एक विकल्प प्रदान करेगा जो औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कर पातीं, ताकि वे सुरक्षित रूप से मदद मांग सकें। राज्य के गृह विभाग के निर्देशानुसार, यह कार्यबल वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारियों की देखरेख में कार्य करेगा। पुलिस ने बताया कि पिछले सात वर्षों में केरल में घरेलू हिंसा के कारण 92 महिलाओं की मृत्यु हुई है, जबकि कई अन्य डर के कारण दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने से बचती हैं। 'स्पीक अप' शिकायतकर्ताओं को शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, कानूनी उपायों और आगे की कार्रवाई को समझने में मदद करेगा।
यह पहल पीड़ितों की गोपनीयता को प्राथमिकता देगी। जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारी वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में संपर्क करेंगे और एक निश्चित अधिकारी हर मामले की निगरानी करेगा। यह अधिकारी हर सप्ताह मामले की प्रगति, काउंसलिंग की आवश्यकताओं और पीड़ित की आजीविका में मदद की समीक्षा करेगा।
डिजिटल हेल्पलाइन, व्हाट्सएप और एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से शिकायतों को जल्दी दर्ज करने और समय पर सहायता प्रदान करने के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। पीड़ितों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और इसके लिए यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों जैसी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं के सहयोग से इस पहल के तहत स्थानीय स्तर पर आश्रय गृह और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बनाने का प्रस्ताव भी है।
सुश्री अजीथा बेगम ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें पुलिस मंजूरी प्रमाण-पत्र और पासपोर्ट न देना भी शामिल है।
