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कैलिफोर्निया में भारतीय कारोबारी पर 100 मिलियन डॉलर की बैंक धोखाधड़ी का आरोप

कैलिफोर्निया में एक भारतीय मूल के कारोबारी महेंद्र मखीजानी पर 100 मिलियन डॉलर की बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगा है। उन्हें फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से गिरवी संपत्तियों का मूल्य बढ़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। मखीजानी की कंपनी 'कैंटर ग्रुप' ने एक बैंक के साथ लोन का बड़ा समझौता किया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने दस्तावेजों में हेरफेर की और बैंक अधिकारियों को गुमराह किया। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
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कैलिफोर्निया में भारतीय कारोबारी पर 100 मिलियन डॉलर की बैंक धोखाधड़ी का आरोप

कैलिफोर्निया में धोखाधड़ी का मामला

कैलिफोर्निया: अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक भारतीय मूल के व्यवसायी द्वारा बैंक के साथ करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संघीय अभियोजकों के अनुसार, 44 वर्षीय महेंद्र मखीजानी को एक बैंक को लगभग 100 मिलियन डॉलर (957 करोड़ रुपये) का धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मखीजानी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से गिरवी संपत्तियों का मूल्य बढ़ाकर दिखाया। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को इस मामले में बैंक धोखाधड़ी की आपराधिक शिकायत दर्ज की है।


फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखा

अभियोजकों का कहना है कि मखीजानी ने संपत्तियों के टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में हेरफेर किया और फेडरल इंश्योर्ड बैंक के पास गिरवी रखे गए रियल-एस्टेट समर्थित लोन की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। इस धोखाधड़ी के कारण बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, मखीजानी न्यूपोर्ट बीच में स्थित 'कैंटर ग्रुप' नामक कंपनी का संचालन करते हैं, जिसने एक बैंक के साथ लोन का बड़ा समझौता किया था।


100 मिलियन डॉलर के लोन का विवरण

समझौते के तहत, बैंक ने कैंटर ग्रुप को रियल एस्टेट संपत्तियों पर आधारित लोन देने के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर की राशि दी थी। इसके बदले में, कंपनी को उन ऋणों और संबंधित संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखना था। यह शर्त थी कि केवल फर्स्ट-लियन संपत्तियों को ही गिरवी रखा जा सकता है।


कागजातों में हेरफेरी का तरीका

फेडरल जांचकर्ताओं का कहना है कि मखीजानी ने सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच टाइटल इंश्योरेंस पॉलिसियों में जालसाजी की। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि कैंटर ग्रुप के पास संपत्तियों पर 'फर्स्ट-लियन' का अधिकार है, जबकि असल में अन्य लेनदारों का उन पर पहला दावा था। जांच में यह भी पाया गया कि मखीजानी और उनके एक सहयोगी ने एडोब सॉफ्टवेयर का उपयोग करके दस्तावेजों में छेड़छाड़ की।


मुकदमा और आगे की कार्रवाई

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मखीजानी ने बैंक अधिकारियों को गुमराह किया और दिसंबर 2024 में टाइटल विसंगतियों के बारे में गलत जानकारी वाली स्प्रेडशीट भी प्रस्तुत की। बैंक ने अगस्त 2025 में लॉस एंजेल्स सुपीरियर कोर्ट में इस मामले में मुकदमा दायर किया था। वर्तमान में फेडरल जांचकर्ताओं की गहन जांच जारी है। यदि मखीजानी पर आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें अमेरिकी कानूनों के तहत कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।