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कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी में कमी: पीएम राहत कोष पर प्रभाव

कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत कंपनियों का प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में योगदान पिछले कुछ वर्षों में काफी घट गया है। 2024-25 में खर्च किए गए 40,000 करोड़ रुपये में से केवल 468 करोड़ रुपये ही PMNRF में गए हैं। इस लेख में CSR के खर्च का विस्तृत विश्लेषण और इसके प्रभावों पर चर्चा की गई है। जानें कि कंपनियां किस प्रकार के सामाजिक कार्यों पर धन खर्च कर रही हैं और पीएम राहत कोष में कमी के पीछे के कारण क्या हैं।
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कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व

बड़ी कंपनियां कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से सामाजिक दायित्व निभाती हैं। नियमों के अनुसार, कंपनियों को अपने औसत लाभ का 2 प्रतिशत सामाजिक विकास कार्यों पर खर्च करना अनिवार्य है। इसके तहत, कंपनियों द्वारा हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। हाल के आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में CSR फंड का योगदान लगभग चार गुना घट गया है। 2024-25 में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च होने के बावजूद, चार साल पहले 1698 करोड़ रुपये का योगदान अब घटकर 468 करोड़ रुपये रह गया है।


CSR खर्च का विवरण

कंपनियों को एक CSR कमेटी बनानी होती है, जो CSR गतिविधियों की योजना बनाती है। सभी कंपनियों को इस खर्च का ब्योरा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को भी देना होता है। आमतौर पर, ये कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सफाई, महिला कल्याण और अन्य सामाजिक कार्यों पर धन खर्च करती हैं।


संसद में उठे सवाल

राज्यसभा में सांसदों ने पिछले पांच वर्षों में CSR फंड के खर्च का डेटा मांगा है। सांसदों ने यह भी पूछा कि ये पैसे किन कार्यों पर खर्च किए गए। इस पर मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने 21 जुलाई को जानकारी दी।


आंकड़ों का विश्लेषण

पिछले पांच वर्षों में CSR फंड के माध्यम से कुल 161,246.66 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कंपनियों को अपने लाभ का 2 प्रतिशत इन गतिविधियों पर खर्च करना होता है। सबसे अधिक धन स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में खर्च किया गया है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में शिक्षा पर 13,877.34 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य पर 8530.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।


पर्यावरण पर बढ़ता खर्च

पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण पर खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2020-21 में इस पर केवल 1030.16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2024-25 में यह राशि बढ़कर 3396.75 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा, गरीबी उन्मूलन, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण विकास, खेल विकास के लिए प्रशिक्षण और वोकेशनल ट्रेनिंग पर भी हर साल एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।


PM राहत कोष में कमी

प्रधानमंत्री राहत कोष पूरी तरह से क्राउड फंडिंग पर निर्भर है। इसमें आम जनता के साथ-साथ कंपनियां भी योगदान कर सकती हैं। इस कोष में दिए गए पैसे पर आयकर की धारा 80 (G) के तहत छूट भी मिलती है। इन फंड का उपयोग प्राकृतिक आपदाओं, दंगों और बड़ी दुर्घटनाओं के समय राहत कार्यों में किया जाता है।


कंपनियों के CSR आंकड़े बताते हैं कि 2020-21 में पीएम राहत कोष में 1698.38 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद, अगले वर्ष यह राशि घटकर 1229.35 करोड़ रुपये रह गई। 2022-23 में 857.06 करोड़, 2023-24 में 644.10 करोड़ और 2024-25 में केवल 468.50 करोड़ रुपये का योगदान दिया गया।