कोडीन सिरप मामले में न्यायाधीश ने खुद को अलग किया, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला
कोडीन सिरप विवाद में न्यायाधीश का निर्णय
कोडीन सिरप विवाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी भोला जायसवाल सहित 75 आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश कृष्ण पहल ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों तक पहुंच बनाने या किसी मामले को प्रभावित करने का प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इस घटना के बाद, न्यायाधीश ने इसे उच्च न्यायालय के इतिहास का काला दिन बताया।
सूत्रों के अनुसार, वादकारी पक्ष ने निर्णय सुरक्षित रखने से पहले न्यायाधीश से निजी संपर्क साधने का प्रयास किया था। न्यायाधीश कृष्ण पहल ने न्यायपालिका की निष्पक्षता की रक्षा के लिए सभी याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की नींव इस विश्वास पर टिकी है कि न्याय निष्पक्ष और बाहरी प्रभावों से मुक्त होना चाहिए। यदि कोई पक्षकार न्यायाधीश से संपर्क करने का प्रयास करता है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर गंभीर आघात है।
अदालत ने कहा कि न्यायाधीश तक निजी पहुंच बनाने का प्रयास न्यायिक प्रणाली की गरिमा को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह का प्रयास किया जाता है और निर्णय किसी पक्ष में आता है, तो निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो सकता है। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि इसे निष्पक्षता के साथ दिखना भी चाहिए। अदालत ने आदेश दिया कि सभी जमानत याचिकाएं और संबंधित मामले 7 अगस्त 2026 को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाएं।
गौरतलब है कि सभी आरोपियों ने पहले प्राथमिकी रद्द कराने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय और लखनऊ खंडपीठ का रुख किया था, लेकिन उनकी याचिकाएं खारिज हो गई थीं। इसके बाद, अदालत ने अग्रिम जमानत की मांग भी ठुकरा दी थी। अब गिरफ्तार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश को प्रभावित करने का मामला बेहद चौंकाने वाला है, जहां आरोपियों ने दुस्साहस दिखाते हुए न्यायाधीश तक पहुंचने का प्रयास किया है।
इस मामले में शामिल राजनेताओं और अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। एसआईटी ने थोक कारोबारियों, दवा कंपनियों और फुटकर दुकानदारों पर कार्रवाई की है, लेकिन मुख्य आरोपियों को बचाने वाले सफेदपोश अब तक बचते रहे हैं। दुबई में छिपे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी नहीं आई है, जबकि उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। उसके पिता भोला प्रसाद की जमानत याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ सुनवाई कर रही थी। हाल ही में, एसटीएफ ने 12 आरोपियों के खिलाफ 40 हजार पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है।
