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कोरोना के अनाथ बच्चों के लिए पीएम केयर्स फंड की अनियमितताएँ

कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम केयर्स फंड में अनियमितताओं की चर्चा हो रही है। 2022-23 में 346 करोड़ रुपये का आवंटन होने के बावजूद, अगले वर्षों में यह राशि घटकर 15 करोड़ और फिर 88 लाख रुपये रह गई। रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए हैं, जैसे कि अमल करने वाली एजेंसियों द्वारा 324 करोड़ रुपये का रीफंड क्यों किया गया। क्या यह गड़बड़ियों को छिपाने का प्रयास है? जानें इस फंड के उपयोग और सरकार की योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी।
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कोरोना काल में अनाथ बच्चों के लिए सहायता


कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों के लिए 2022-23 में 346 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, लेकिन इसके बाद 2023-24 में यह राशि घटकर 15 करोड़ रुपये और 2024-25 में केवल 88 लाख रुपये रह गई। यह स्थिति चिंताजनक है।


हाल ही में पीएम केयर्स फंड की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट जारी की गई है, जो स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे कई सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अमल करने वाली एजेंसियों ने 324 करोड़ रुपये का रीफंड किया। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये एजेंसियां कौन हैं और क्या यह धन लौटाने का कारण गड़बड़ियों को छिपाना है?


रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस कोष में कुल 8,452 करोड़ रुपये हैं, जबकि 2024-25 में केवल 88 लाख रुपये यानी 0.01 प्रतिशत का उपयोग सहायता के लिए किया गया। 93 प्रतिशत राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है, जिससे कोष को 469 करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त हुआ। हालांकि, कोष का उद्देश्य केवल पैसे से पैसा बनाना नहीं है।


सरकार ने यह भी कहा था कि इस कोष से कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को सहायता प्रदान की जाएगी। प्रत्येक बच्चे को 20,000 रुपये प्रति वर्ष और 18 वर्ष की आयु में 10 रुपये एकमुश्त देने की घोषणा की गई थी। सरकार ने 3,383 लाभार्थी बच्चों की सूची भी जारी की है। 2024-25 में खर्च की गई कुल राशि को इस संख्या से विभाजित करने पर प्रति बच्चे केवल 2,596 रुपये का अनुदान मिलता है।


इस प्रकार, 2022-23 में 346 करोड़ रुपये का आवंटन होने के बावजूद, अगले वर्षों में यह राशि इतनी कम क्यों हो गई? सरकार को इस पर स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए। आखिरकार, यह कोष किस उद्देश्य के लिए संचित किया जा रहा है?