कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: पीएम मोदी ने दी स्वस्थ वृद्धावस्था की प्रेरणा
योग दिवस का उत्सव
कोलकाता: 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2026) के अवसर पर आज पूरी दुनिया योग के रंग में रंगी हुई है। इस साल के मुख्य राष्ट्रीय समारोह का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता पहुंचे। उन्होंने कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए योग की महत्ता को उजागर किया। पीएम मोदी ने योग को एक अद्वितीय और कल्याणकारी शक्ति के रूप में सराहा, जो न केवल व्यक्ति को स्वस्थ जीवन प्रदान करती है, बल्कि मानवता को एक सूत्र में पिरोकर एकजुट करती है।
योग का महत्व सभी के लिए
'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' सिर्फ बुजुर्गों के लिए नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रेरणादायक भाषण में इस वर्ष की थीम पर जोर देते हुए कहा कि 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) विषय को केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह सभी उम्र के लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि योग न केवल हमारी व्यक्तिगत जीवनशैली को सुधारने में सहायक है, बल्कि यह एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक है।
योग से उम्र की सीमाओं को पार करें
उम्र को इंसानी क्षमता पर हावी न होने दे योग
प्रधानमंत्री ने जीवन के विभिन्न चरणों में योग की उपयोगिता को समझाते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हम 40 की उम्र में 20 से अधिक सक्रिय रहें, और 50 की उम्र में 30 साल के युवा से अधिक ऊर्जावान दिखें। योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है, ऊर्जा के स्तर को ऊंचा बनाए रखता है और तनावमुक्त जीवन जीने में मदद करता है। यह जीवन के अंतिम चरण में भी हमें सक्रिय और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने का एक प्रभावी साधन है।
योग को जीवन का हिस्सा बनाएं
एक दिन का उत्सव नहीं, जीवन का हिस्सा बनाएं: पीएम मोदी
भाषण के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि योग को केवल 21 जून के एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे पूरे साल अपने जीवन में शामिल करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने जनसमूह को संकल्प दिलाते हुए कहा:
'आइए, आज हम सब मिलकर एक पवित्र प्रतिज्ञा लें कि हम योग को सिर्फ एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखेंगे। हम योग को अपने दैनिक जीवन का, अपने परिवार का और अपनी आने वाली पीढ़ियों के संस्कारों का एक अभिन्न हिस्सा बनाएंगे।' प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत की यह प्राचीन परंपरा अब एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और वैश्विक सद्भाव की मजबूत नींव रख रही है।
