कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक की गिरफ्तारी: क्या है सच्चाई?
कोलकाता में दुष्कर्म और हत्या का मामला
कोलकाता: वर्ष 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी विकास हुआ है। पुलिस ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया है, जिन पर मृतका का अंतिम संस्कार जल्दी करवाने और सबूत नष्ट करने की साजिश का आरोप है। इसके साथ ही पानीहाटी नगरपालिका के पार्षद सोमनाथ डे और पीड़िता के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया है। पूर्व विधायक को ओडिशा के संबलपुर से हिरासत में लिया गया है, जिससे इस संवेदनशील मामले में हलचल बढ़ गई है।
परिवार की शिकायत पर नई FIR
यह कार्रवाई मृतका के पिता द्वारा दर्ज कराई गई नई शिकायत के आधार पर की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी का अंतिम संस्कार परिवार की सहमति के बिना और जल्दबाजी में किया गया था।
परिवार का मानना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि शव का दोबारा पोस्टमार्टम न हो सके और महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो जाएं।
जांच एजेंसियों के सामने उठे सवाल
हाल ही में पीड़िता के लिए आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने मामले की नई जांच के निर्देश दिए। पुलिस जांच में श्मशान घाट की प्रक्रियाओं में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बताया गया है कि जब पीड़िता का शव श्मशान लाया गया, तब पहले से मौजूद दो अन्य शवों को छोड़कर इसका तड़बड़ में दाह-संस्कार कर दिया गया। इसके अलावा, अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेजों पर परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे और नियमानुसार ली जाने वाली फीस भी माफ कर दी गई थी।
सीबीआई जांच से अलग है यह नया मामला
बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खड़दह थाने में दर्ज यह नया मामला सीबीआई द्वारा की जा रही मूल दुष्कर्म और हत्या की जांच से अलग है। सीबीआई मुख्य अपराध के पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि स्थानीय पुलिस का यह नया मामला सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश रचने और परिजनों की इच्छा के खिलाफ जाकर जबरन अंतिम संस्कार कराने के आरोपों पर केंद्रित है। इस गिरफ्तारी ने मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका को लेकर भी जांच को तेज कर दिया है।
