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कोलकाता हाई कोर्ट ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की दी अनुमति

कोलकाता हाई कोर्ट ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव में चुनाव लड़ने की अनुमति दी है, बशर्ते उन्हें जमानत मिले। अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं, जबकि मिलन प्रधान पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जानें इस निर्णय के पीछे की कहानी और क्या है आगे की राह।
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कोलकाता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

कोलकाता में कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी और ममता बनर्जी को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अदालत ने कहा है कि यदि नंदीग्राम विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत मिलती है, तो उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से यह निर्देश दिया।


मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, जिन्हें ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त है। यह ध्यान देने योग्य है कि ममता की उम्मीदवार संचिता प्रधान ने चुनावी दौड़ से हटने का निर्णय लिया है। हालांकि, मिलन प्रधान पर 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, और उन्हें पांच मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्तमान में वे जेल में हैं। गिरफ्तारी के बाद, हल्दिया एसडीएम कोर्ट ने उन्हें 19 सितंबर को चार मामलों में न्यायिक हिरासत में भेजा था। नंदीग्राम सीट पर मतदान 6 अक्टूबर को होना है।


मिलन प्रधान के खिलाफ मामले 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हुए हैं। नामांकन के समय उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन जैसे ही ममता बनर्जी ने उनका समर्थन किया, पुलिस ने उनके मामलों को फिर से उठाया। उन्हें नंदीग्राम आंदोलन के अलावा आर्म्स एक्ट के दो दशक पुराने मामले में भी गिरफ्तार किया गया। हालांकि, अदालत की टिप्पणियों के बावजूद, यह संभावना कम है कि मिलन प्रधान चुनाव प्रचार स्वयं कर पाएंगे, क्योंकि चार अक्टूबर को चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा।