क्या कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर चर्चा
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बावजूद, तेल कंपनियों की समस्याएं कम होती नहीं दिख रही हैं। सरकार ने पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, लेकिन इसके बावजूद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर आर्थिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में, आने वाले महीनों में ईंधन बाजार की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव और उसके प्रभाव
जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा था, तब कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं, जिससे कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए थे। उस समय, केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि, बाद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे आ गईं। इसके बावजूद, तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से मजबूत नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अभी भी लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का सामना करना पड़ रहा है।
पहली तिमाही में संभावित दबाव
ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और एचपीसीएल जैसी प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत चुनौतीपूर्ण हो सकती है। रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि FY27 की पहली तिमाही के दौरान पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। पेट्रोल पर लगभग 7 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक की अंडर-रिकवरी की आशंका जताई गई है, जिसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और मुनाफे पर पड़ सकता है।
एक्साइज ड्यूटी में कमी का जोखिम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा पहले दी गई एक्साइज ड्यूटी में कटौती को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो तेल कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। जानकारों के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी में कमी के कारण सरकार को हर साल 1.7 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कच्चे तेल में राहत, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। इससे तेल कंपनियों को कुछ राहत मिली है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत लंबे समय तक बनी रहे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। कई देश अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को फिर से भरने की तैयारी कर सकते हैं, जिससे वैश्विक मांग बढ़ सकती है और कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।
22 जून को प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) |
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| जयपुर | 112.66 | 97.78 |
| पटना | 112.70 | 99.87 |
| लखनऊ | 102.05 | 99.28 |
| भोपाल | 114.65 | 99.74 |
