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क्या घर का खाना वास्तव में सेहतमंद है? विशेषज्ञों की नई चेतावनी

क्या घर का बना खाना वास्तव में सेहत के लिए अच्छा है? विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक भारतीय थाली में कार्बोहाइड्रेट की अधिकता और प्रोटीन की कमी है। जानें कि कैसे छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी थाली को संतुलित और प्रोटीन-समृद्ध बना सकते हैं। इस लेख में विशेषज्ञों के सुझाव और एक नई दृष्टिकोण के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
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घर का बना भोजन: सेहत के लिए खतरा?

नई दिल्ली: भारतीय परिवारों में यह मान्यता रही है कि घर का बना साधारण भोजन स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है। दाल, रोटी, चावल और सब्जी से भरी थाली को संतुलित आहार माना जाता है। लेकिन अब फिटनेस और पोषण विशेषज्ञों ने इस पारंपरिक धारणा पर सवाल उठाए हैं। फिटनेस कंसल्टेंट सान्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत विश्लेषण साझा किया है, जिसमें बताया गया है कि उत्तर भारतीय घरों में बनने वाला दैनिक भोजन 'कार्बोहाइड्रेट-हैवी' होता है, जिसमें प्रोटीन की कमी होती है। विशेषज्ञ का कहना है कि केवल घर पर पकाया गया भोजन पोषण के मानकों पर खरा नहीं उतरता।


भारतीय थाली का पोषण: 800 कैलोरी, अधिक कार्ब्स और कम प्रोटीन
विशेषज्ञ ने उत्तर भारत की एक सामान्य थाली का पोषण मूल्य साझा किया है, जिससे पता चलता है कि लोग अनजाने में कितना असंतुलित भोजन कर रहे हैं:


– 4 रोटी: ~320 कैलोरी, 12 ग्राम प्रोटीन


– आलू की सब्जी: ~200 कैलोरी, 3 ग्राम प्रोटीन


– पतली दाल: ~80 कैलोरी, 5 ग्राम प्रोटीन


– सफेद चावल: ~200 कैलोरी, 4 ग्राम प्रोटीन


इस थाली का कुल जोड़ लगभग 800 कैलोरी, 141 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और केवल 24 ग्राम प्रोटीन है। यदि कोई व्यक्ति दिन में दो बार ऐसा भोजन करता है, तो उसे पूरे दिन में मुश्किल से 48 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जो औसत वयस्क की दैनिक आवश्यकता को भी पूरा नहीं करता। इसके विपरीत, अधिक स्टार्च और कार्ब्स का सेवन मोटापे, फैटी लिवर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।


घर का बना भोजन हमेशा सेहतमंद नहीं होता
लोग अक्सर जंक फूड या पैकेज्ड फूड से बचते हैं, लेकिन घर के भोजन के पोषण, तेल की मात्रा और भाग के आकार पर ध्यान नहीं देते। सान्या के अनुसार, कई घरों में अधिक तेल, मसालों और आलू जैसी स्टार्च वाली सब्जियों से बने भोजन का मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 'होमकुक्ड' टैग के कारण लोग बिना सोचे-समझे अधिक रोटियां और चावल खा लेते हैं, जिससे कैलोरी का अधिशेष हो जाता है।


क्या पतली दाल से पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है?
शाकाहारी परिवारों में दाल को प्रोटीन का मुख्य स्रोत माना जाता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। घरों में अक्सर जो दाल बनती है, उसमें पानी की मात्रा अधिक और दाल के दानों की मात्रा कम होती है। एक कटोरी पतली दाल से केवल 4 से 5 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जो शरीर की आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त है। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दाल से प्रोटीन की जरूरत पूरी करनी है, तो उसे गाढ़ा बनाना होगा और उसकी मात्रा बढ़ानी होगी।


थाली को प्रोटीन-समृद्ध बनाने के लिए 4 सुझाव
एक्सपर्ट ने रोजमर्रा की थाली को संतुलित और उच्च प्रोटीन बनाने के लिए कुछ सरल बदलाव सुझाए हैं:


1. रोटियों की संख्या कम करें: थाली में 4 की बजाय केवल 2 रोटियां लें, जिससे कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो जाएगी।


2. आलू की जगह प्रोटीन युक्त सब्जियां: सब्जियों में आलू मिलाने की आदत छोड़ें। हफ्ते में कम से कम 5 दिन पनीर, सोया/टोफू, बेसन, अंडे या चिकन जैसी उच्च प्रोटीन वाली सब्जी बनाएं।


3. दाल को गाढ़ा करें: दाल में पानी की मात्रा कम करें और कटोरी का आकार बड़ा रखें ताकि अधिक अमिनो एसिड मिल सके।


4. दही या योगर्ट शामिल करें: रोज के खाने में एक कटोरी ताजा दही या योगर्ट जरूर शामिल करें।


विशेषज्ञों के अनुसार, इन छोटे-छोटे बदलावों से एक समय की थाली में प्रोटीन की मात्रा 24 ग्राम से बढ़कर 45 से 50 ग्राम तक पहुंच सकती है, जो मांसपेशियों की मजबूती और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।