क्या चिप्स और भुजिया पर लगेगा लाल निशान? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली: सुपरमार्केट में बिकने वाले चिप्स या शाम की चाय के साथ खाने वाली भुजिया में छिपे नमक, चीनी और वसा की मात्रा अब पैकेट पर स्पष्ट रूप से दर्शाई जाएगी। डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में हानिकारक तत्वों की अधिकता को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। इस निर्णय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), याचिकाकर्ताओं और देश के खाद्य उद्योग को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI और केंद्र सरकार की धीमी कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सेहत, किसी भी कॉर्पोरेट लाभ से अधिक महत्वपूर्ण है। इस दबाव के चलते, केंद्र सरकार ने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन, 2020' में आवश्यक संशोधन के लिए तीन महीने का समय मांगा है।
कॉर्पोरेट का विरोध
लगभग 100 अरब डॉलर की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था AIFPA इस प्रस्तावित बदलाव का विरोध कर रही है। उद्योग का मुख्य तर्क 'सर्विंग साइज़' (परोसने की मात्रा) को लेकर है। उनका कहना है कि खतरे का आकलन 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर के पैमाने पर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अचार या भुजिया जैसी चीजें आमतौर पर 5-10 ग्राम की मात्रा में खाई जाती हैं।
FSSAI और याचिकाकर्ता के बीच मतभेद
इस मामले की जड़ चेतावनी जारी करने के नियमों में है। FSSAI ने अदालत में हलफनामा दायर कर प्रस्तावित किया है कि पैकेट के सामने लाल रंग का हेक्सागन (छट्कोण) लेबल लगाया जाए, जिसका फॉन्ट साइज़ पीछे छपे न्यूट्रिशन चार्ट से बड़ा हो। हालांकि, FSSAI की प्रारंभिक शर्त थी कि यह चेतावनी तभी अनिवार्य होगी जब नमक, चीनी या वसा में से कम से कम दो तत्व तय सीमा से अधिक हों।
छोटे कारोबारियों का भविष्य
कड़े नियमों से कंपनियों को यह चिंता है कि नमकीन, समोसा, पापड़ और अन्य पारंपरिक भारतीय व्यंजन सीधे लाल निशान के दायरे में आ जाएंगे। जबकि बड़ी कंपनियां अपने फॉर्मूला में बदलाव कर इन सीमाओं से बच सकती हैं, छोटे और कुटीर उद्योग के निर्माताओं के लिए ऐसा करना तकनीकी और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर हैं, जो तय करेगा कि उपभोक्ता को केवल ब्रांड का नाम दिखेगा या स्वास्थ्य से जुड़ा 'लाल निशान' भी, जो उन्हें सही चुनाव करने का अवसर देगा।
