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क्या भारत-चीन के बीच तनाव कम होगा? पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर नजरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात भारत-चीन के बीच सीमा विवाद के चलते बढ़ते तनाव के बीच हुई है। पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने युद्ध समाप्त करने की अपील की। SCO संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी और वर्तमान में इसमें 10 सदस्य देश शामिल हैं। क्या यह मुलाकात तनाव को कम करने में सहायक होगी? जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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नई दिल्ली में SCO बैठक में महत्वपूर्ण मुलाकात


नई दिल्ली: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की। पिछले कुछ वर्षों से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के चलते तनाव बना हुआ है, इसलिए इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी इस बैठक में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे थे।


मंगलवार की सुबह, सभी देशों के प्रतिनिधियों ने ग्रुप फोटो के लिए एकत्रित हुए। इस अवसर पर, पीएम मोदी ने शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मुलाकात की। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।




भारत-चीन के बीच तनाव का कारण

क्यों बढ़ा भारत और चीन के बीच तनाव  


भारत और चीन के संबंधों में 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर स्थिति को लेकर कई बार बातचीत हुई। ऐसे में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर सभी की नजरें हैं।


SCO का परिचय

10 देशों का संगठन है SCO


शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान थे। भारत और पाकिस्तान 2017 में इस संगठन में शामिल हुए, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में SCO का हिस्सा बने। वर्तमान में इस संगठन में कुल 10 सदस्य देश हैं।


पुतिन से पीएम मोदी की मुलाकात

पुतिन से भी मिले पीएम मोदी


SCO बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत की। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति से युद्ध को जल्द समाप्त करने की अपील की, यह कहते हुए कि युद्ध का हर दिन मानवता के लिए हानिकारक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत शांति के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।