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क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटेंगी? जानें मंत्री का बयान

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने संकेत दिया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना कम है। उन्होंने बताया कि तेल कंपनियों ने उच्च कीमतों पर कच्चा तेल खरीदा था, जिससे उन्हें नुकसान हुआ है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की योजना क्या है।
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अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब समाप्त हो चुका है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर समुद्री परिवहन में सुधार देखने को मिल रहा है। 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के बाद से कच्चे तेल की कीमतें अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। इस स्थिति में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी लाएगी, क्योंकि जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी थीं, तो सरकार ने तुरंत दाम बढ़ा दिए थे। अब गिरावट के समय क्या ऐसा ही कदम उठाया जाएगा?


हरदीप पुरी का बयान

कीमत घटाने पर क्या बोले मंत्री हरदीप पुरी?


इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी की संभावना कम है।


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब पुरी से पूछा गया कि क्या ईंधन की कीमतों में कमी आएगी, तो उन्होंने कहा कि यदि अगले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं, तो यह एक उचित सवाल होगा।


भारत की रणनीतिक भंडारण योजना

रणनीतिक भंडार बढ़ाएगा भारत


पुरी ने मध्य पूर्व संकट के बीच रणनीतिक तेल भंडार को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सबक है, और हम भंडारण क्षमता को बढ़ाने की कोशिश करेंगे।


ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान

ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर फोकस


रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत मौजूदा तेल की कीमतों में गिरावट का उपयोग ईंधन भंडार क्षमता को बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए करेगा। वर्तमान में, बंदरगाहों, टर्मिनलों, रिफाइनरियों और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में 76 से 80 दिनों का कच्चा तेल उपलब्ध है।


सरकार की कीमतों में कटौती से बचने की वजह

कीमत घटाने से क्यों बच रही सरकार?


हरदीप पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान तेल कंपनियों ने उच्च कीमतों पर कच्चे तेल की खरीद की थी। इस समय रिफाइनिंग की प्रक्रिया चल रही है। 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत मूल्य से कम पर बेचा गया, जिससे तेल विपणन कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अब जबकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हैं, कंपनियों ने पहले ही महंगे दामों पर तेल खरीदा था।


इसका मतलब यह है कि कंपनियां अभी जिस तेल को रिफाइन कर रही हैं, उसकी खरीद पहले ही उच्च कीमत पर की गई थी। इसलिए कीमतें घटाने से कंपनियों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। हालांकि, उम्मीद है कि जब कच्चा तेल कम कीमत पर खरीदा जाएगा, तो सरकार कीमतों में कटौती कर सकती है।


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

कच्चा तेल सबसे निचले स्तर पर


गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। 30 अप्रैल को एक बैरल की कीमत 126 डॉलर थी। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 27 फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं।