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क्या मानसून की अनिश्चितता से भारत की चावल उत्पादन में आएगी भारी गिरावट?

भारत में मानसून की विदाई के साथ कृषि क्षेत्र में गंभीर चिंताएं उभर रही हैं। इस वर्ष चावल उत्पादन में गिरावट की आशंका है, जो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम हो सकता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बारिश में कमी ने धान की बुवाई को प्रभावित किया है, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सरकारी गोदामों में पर्याप्त चावल का भंडार होने से घरेलू बाजार में आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और संभावित समाधान।
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चावल उत्पादन पर संकट के संकेत


नई दिल्ली: देश में मानसून के बादलों की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन जाते-जाते यह मौसम कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चिंताएं छोड़ गया है। इस बार प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न काफी अस्थिर रहा। प्रारंभ में कम वर्षा के चलते धान की बुवाई का क्षेत्रफल घटा, और अब फसल के तैयार होने के समय पर नमी की कमी ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन को प्रभावित करने का खतरा पैदा कर दिया है। इसके अलावा, आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव मौसम की स्थिति को और भी चुनौतीपूर्ण बना सकता है।


रकबे में कमी से उत्पादन पर संकट

कृषि मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष चावल उत्पादन में दशक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। पिछले वर्ष जहां रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार इसके घटकर लगभग 14.4 करोड़ टन रहने की संभावना है। यह लगभग एक करोड़ टन की कमी कृषि अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। 


मानसून में 15 प्रतिशत की कमी, सूखे का खतरा

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक देश में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उत्तर और मध्य भारत के धान उत्पादक क्षेत्रों में यह कमी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है। देश के 792 जिलों में से 327 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है, जिनमें से 320 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत तक की कमी देखी गई, जबकि सात जिलों में सूखा 60 प्रतिशत से अधिक रहा। 


इसका प्रभाव केवल धान पर ही नहीं, बल्कि मक्का, सोयाबीन और मूंग जैसी फसलों पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया है। अरहर और उड़द की बुवाई में थोड़ी वृद्धि जरूर हुई है। धान का रकबा पिछले वर्ष के 445.92 लाख हेक्टेयर से घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गया है, यानी लगभग 16.64 लाख हेक्टेयर भूमि पर इस बार धान की रोपाई नहीं हो सकी। 


उत्पादन में गिरावट के बावजूद राहत

उत्पादन में इतनी बड़ी कमी के बाद महंगाई और निर्यात संकट का डर अक्सर सताने लगता है, लेकिन इस बार अनाज का सरकारी गोदाम एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है। सितंबर तक राज्यों के पास लगभग 5.96 करोड़ टन चावल का सुरक्षित बफर स्टॉक उपलब्ध था, जो निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। यही कारण है कि उत्पादन में कमी के बावजूद घरेलू बाजार में आपूर्ति बाधित होने या निर्यात पर तुरंत कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना काफी कम है।