क्या है टायसन की वीरता? जानें भारतीय सेना के इस असॉल्ट डॉग की कहानी
टायसन: एक अद्वितीय असॉल्ट डॉग की कहानी
नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर, जब पूरा देश अपने वीर जवानों की शहादत को याद कर रहा है, एक विशेष नाम ने सभी का ध्यान खींचा है। यह नाम किसी मानव योद्धा का नहीं, बल्कि भारतीय सेना के 2 पैरा स्पेशल फोर्सेस से जुड़े असॉल्ट डॉग 'टायसन' का है। किश्तवाड़ में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान, टायसन ने अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकियों के ठिकाने का पता लगाया और पैर में गोली लगने के बावजूद पीछे नहीं हटा। इस अद्वितीय साहस के लिए उसे 'मेंशन-इन-डिस्पैचेज' सम्मान से नवाजा गया है। स्वतंत्रता दिवस पर यह सम्मान पाने वाला वह एकमात्र आर्मी डॉग है।
टायसन की बहादुरी का अद्भुत उदाहरण
यह घटना इस वर्ष फरवरी में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छत्रू क्षेत्र में हुई, जब सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के संभावित ठिकाने की ओर बढ़ने का निर्णय लिया। इस खतरनाक मिशन में, एक मानव सैनिक की जगह टायसन को आगे भेजा गया।
टायसन, जो भारतीय सेना की रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स का हिस्सा है, ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब वह एक कच्चे मकान के पास पहुंचा, जहां जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी छिपे हुए थे, तब आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें एक गोली टायसन के पैर में लगी।
दर्द के बावजूद टायसन का साहस
हालांकि टायसन को गंभीर चोट आई, लेकिन उसने अपने कदम पीछे नहीं हटाए। उसने अपनी बहादुरी से आतंकियों का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिससे सुरक्षा बलों को उनकी स्थिति का पता चला। टायसन की इस बहादुरी ने सुरक्षा बलों को निर्णायक कार्रवाई करने में मदद की।
इस 88 घंटे के ऑपरेशन में, सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया, जिनमें एक वरिष्ठ कमांडर भी शामिल था। ऑपरेशन के बाद, टायसन को तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई और उसकी जान बचाई गई।
स्वतंत्रता दिवस पर टायसन का सम्मान
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों के लिए वीरता पुरस्कारों की घोषणा की। इस सूची में टायसन का नाम 'ऑपरेशन रक्षक' के तहत शामिल किया गया, जो यह दर्शाता है कि भारतीय सेना के ये चार पैरों वाले सैनिक कितने महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय सेना के श्वानों की गौरवशाली परंपरा
टायसन की यह उपलब्धि भारतीय सेना के उन कई सैन्य श्वानों की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी। पिछले वर्षों में भी कई श्वानों को उनके साहस के लिए सम्मानित किया गया है।
भारतीय सेना में डॉग स्क्वाड केवल पालतू जानवर नहीं होते, बल्कि वे विशेष रूप से प्रशिक्षित योद्धा होते हैं। गणतंत्र दिवस परेड में इनकी ताकत को प्रदर्शित किया गया था। टायसन ने अपने पराक्रम से भारत के शौर्य इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है।
