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खजुराहो हवाईअड्डा: बिना उड़ान के भी कैसे बना संतोष सूचकांक में नंबर एक?

खजुराहो हवाईअड्डे को हाल ही में यात्रियों की संतोषजनक रैंकिंग में शीर्ष स्थान दिया गया है, जबकि यहां से कोई उड़ान संचालित नहीं हो रही है। यह स्थिति विवाद का कारण बन गई है, क्योंकि अधिकारियों का दावा है कि यह रैंकिंग पहले छह महीनों के फीडबैक पर आधारित है। जानें इस अनोखी स्थिति के पीछे की सच्चाई और क्या यह रैंकिंग वाकई सही है!
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खजुराहो हवाईअड्डे का विवादास्पद सर्वेक्षण


भारत में विमानन क्षेत्र की निगरानी करने वाले निकाय, जैसे एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और विमानन महानिदेशालय (DGCA), यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सुनिश्चित करने में असफल रहे हैं। इसके विपरीत, एयरलाइंस अपनी मनमानी कर रही हैं। हाल ही में, एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने एक नया विवाद खड़ा किया है। उसने यात्रियों की संतुष्टि का एक सर्वेक्षण किया, जिसके परिणामस्वरूप खजुराहो हवाईअड्डे को कस्टमर सैटिस्फेक्शन इंडेक्स में शीर्ष स्थान पर रखा गया।


इस पर विवाद इसलिए उत्पन्न हुआ है क्योंकि 1 जुलाई से खजुराहो हवाईअड्डे से कोई उड़ान संचालित नहीं हुई है। वाराणसी के लिए जो सीमित उड़ान थी, वह भी बंद हो गई है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की कोई संभावना नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पहले छह महीनों के फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया था। लेकिन पहले छह महीनों में भी इस हवाईअड्डे से बहुत सीमित उड़ानें संचालित होती थीं। केवल दो उड़ानें थीं: एक खजुराहो से दिल्ली और दूसरी खजुराहो से वाराणसी। दिल्ली की उड़ान पहले ही बंद हो चुकी थी और वाराणसी की उड़ान 1 जुलाई को बंद हुई। यह सोचने वाली बात है कि जहां न तो विमान हैं और न ही यात्री, वह एयरपोर्ट संतोष सूचकांक में पहले स्थान पर कैसे आ गया!