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खाड़ी देशों का नया ऊर्जा नेटवर्क: होर्मुज स्ट्रेट के बिना तेल सप्लाई की योजना

खाड़ी देशों ने होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने के लिए एक नई ऊर्जा रणनीति विकसित की है। सऊदी अरब, यूएई, इराक, ओमान और कुवैत मिलकर एक वैकल्पिक नेटवर्क तैयार कर रहे हैं, जिसमें नई पाइपलाइनों और भंडारण केंद्रों में अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है। यूएई की वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन परियोजना से निर्यात क्षमता दोगुनी होने की उम्मीद है। इसके अलावा, इराक और ओमान भी अपने-अपने रास्ते विकसित कर रहे हैं। जानें इस नई योजना के बारे में विस्तार से।
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खाड़ी देशों का नया ऊर्जा नेटवर्क: होर्मुज स्ट्रेट के बिना तेल सप्लाई की योजना

खाड़ी देशों की नई पहल

दुबई: दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'होर्मुज स्ट्रेट' का एकाधिकार अब खतरे में पड़ सकता है। कई दशकों से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता रहा है। लेकिन ईरान के साथ हालिया तनाव के मद्देनजर, खाड़ी देशों ने इस मार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। सऊदी अरब, यूएई, इराक, ओमान और कुवैत मिलकर एक वैकल्पिक ऊर्जा नेटवर्क विकसित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर भी तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके लिए नई तेल पाइपलाइनों, रेल कॉरिडोर और विशाल भंडारण केंद्रों में अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है।


यूएई का वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट

यूएई की निर्यात क्षमता में वृद्धि: अबू धाबी ने फुजैरा तक एक नई वेस्ट टू ईस्ट क्रूड पाइपलाइन बनाने का कार्य तेजी से शुरू किया है। यह पाइपलाइन होर्मुज स्ट्रेट के बाहर स्थित फुजैरा बंदरगाह तक सीधे तेल पहुंचाएगी, जिससे यूएई की तेल निर्यात क्षमता 2027 तक लगभग दोगुनी होने की संभावना है। इसके अलावा, यूएई एक उन्नत पाइपलाइन पर भी काम कर रहा है, जो पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे रिफाइंड उत्पादों को सीधे निर्यात करने में सक्षम होगी।


त्रिकोणीय पाइपलाइन कॉरिडोर

कुवैत, सऊदी अरब और यूएई का संयुक्त प्रयास: होर्मुज के संकट से निपटने के लिए, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई एक संयुक्त पाइपलाइन परियोजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस योजना के तहत कुवैत के तेल को पाइपलाइन के माध्यम से सऊदी अरब या यूएई के सुरक्षित बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा, और फिर वहां से इसे वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाएगा। इस बड़े रूट के अंतिम खाके पर अभी मुहर लगना बाकी है।


इराक की नई रणनीति

भूमध्य सागर तक सीधा रास्ता: इराक भी होर्मुज के रास्ते को बायपास करने के लिए जॉर्डन, सीरिया और तुर्की के माध्यम से सीधे भूमध्य सागर तक पहुंचने की योजना बना रहा है। इसमें पहला रूट बसरा से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह तक जाएगा, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 10 लाख बैरल तेल सप्लाई करने की होगी। वहीं, दूसरा रूट बसरा से सीधे ओमान के दुक्म बंदरगाह तक पहुंचेगा, जिससे इराक का तेल बिना किसी रुकावट के लाल सागर तक पहुंच सकेगा। इसके साथ ही, इराक और तुर्की के बीच पुरानी किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को भी अपग्रेड किया जा रहा है।


ओमान का ऑयल स्टोरेज हब

खाड़ी का सबसे बड़ा तेल भंडारण केंद्र: होर्मुज स्ट्रेट के बाहर सुरक्षित स्थानों पर तेल का भंडारण करने के लिए कुवैत और ओमान के बीच एक बड़ी ऑयल स्टोरेज सुविधा बनाने पर बातचीत अंतिम चरण में है। ओमान अपने बंदरगाहों को दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडारण और निर्यात हब के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि युद्ध या किसी संकट के समय खाड़ी देशों को एक मजबूत बैकअप मिल सके।


गैस सप्लाई के लिए नए कॉरिडोर

गैस की सुरक्षित आपूर्ति: कच्चे तेल के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की सुरक्षित आपूर्ति के लिए भी खाड़ी देशों ने बड़े विकल्प तलाश लिए हैं। इसके लिए कतर से सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र होते हुए एक विशाल गैस कॉरिडोर बनाने पर चर्चा चल रही है। इसके अलावा, एक अन्य रूट के जरिए कतर की गैस को सऊदी, जॉर्डन और तुर्की के रास्ते सीधे यूरोप के बाजारों तक पहुंचाने का प्लान है। इस पूरी सप्लाई चैन को रफ्तार देने के लिए खाड़ी देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित 'गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट' को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों को जहाजों के बजाय ट्रेनों के जरिए भी सुरक्षित भेजा जा सकेगा। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि खाड़ी देश अब अपनी अर्थव्यवस्था की चाबी किसी भी कीमत पर ईरान के हाथों में नहीं छोड़ना चाहते।